साल में सिर्फ दो बार होंगे उपचुनाव
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एक राष्ट्र-एक चुनाव समिति की अहम सिफारिश; विकास कार्यों पर मिलेगा ज्यादा ध्यान
नई दिल्ली, 31 अगस्त
देश में अब बार-बार होने वाले उपचुनावों से छुटकारा मिलने की संभावना है। संसदीय समिति ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के दायरे में उपचुनावों को भी शामिल करते हुए सुझाव दिया है कि इन्हें साल में केवल दो बार कराया जाए। यानी हर छह महीने में एक बार ही उपचुनाव होंगे।
राज्यों का समर्थन, आयोग करेगा कार्यक्रम तय
समिति से जुड़े सदस्यों के अनुसार, सबसे पहले हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यह प्रस्ताव रखा, जिसके बाद कई राज्यों और विधि विशेषज्ञों ने इसका समर्थन किया। समिति ने इसे अपनी प्रमुख सिफारिश में शामिल किया है। चुनाव आयोग अब ऐसा कार्यक्रम बनाएगा कि किसी भी रिक्त सीट पर छह महीने से अधिक देरी न हो और उपचुनाव साल में दो बार ही कराए जाएं।
लगातार हो रहे उपचुनावों से राहत
लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद की खाली सीटें छह महीने से अधिक समय तक रिक्त नहीं रह सकतीं। मौजूदा व्यवस्था में लगभग हर महीने कहीं न कहीं उपचुनाव हो जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में ही 28 उपचुनाव हुए, जबकि 2025 में अब तक पांच बार उपचुनाव हो चुके हैं।
बड़ा फायदा: विकास कार्यों पर फोकस
इस पहल से चुनाव आयोग, राज्य सरकारों और राजनीतिक दलों को लगातार चुनावी मोड से राहत मिलेगी। अभी बार-बार चुनाव के चलते प्रशासनिक और राजनीतिक ऊर्जा चुनावों में ही खर्च हो जाती है। अगर उपचुनाव साल में दो बार तक सीमित हो गए तो सरकारों को विकास योजनाओं पर ध्यान देने और नीतियों को आगे बढ़ाने का अधिक समय मिलेगा।
