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हाथ छूटे…और टूट गया पूरा संसार

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हाथ छूटे…और टूट गया पूरा संसार

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चित्तौड़गढ़। 27 अगस्त
कपासन हादसे की कहानी सुनाते हुए 16 वर्षीय हितेश की आंखों से आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उसने कांपती आवाज़ में कहा – “भैया और मैंने भाभी व बहनों का हाथ कसकर पकड़ा था। पर तेज बहाव में एक-एक करके हाथ छूट गए और हम उन्हें बचा न सके।”
दरअसल, मदन गाडरी अपने परिवार के साथ देव दर्शन कर लौट रहे थे। उनके साथ पत्नी ममता, बच्चे, बहनें और रिश्तेदार कुल नौ लोग थे। गाड़ी जब उपरेड़ा की पुलिया पर पहुंची तो बहाव इतना तेज था कि देखते ही देखते वैन पानी में बह गई। सबने किसी तरह कांच तोड़कर बाहर निकलकर छत पर शरण ली। उम्मीद की किरण दिखी, लेकिन तभी तेज धारा ने परिवार के तीन सदस्यों को निगल लिया।
इस हादसे ने मदन को बेसुध कर दिया। पत्नी और बेटी के खोने का दर्द सहना उसके लिए असंभव हो रहा है। गांव वालों के घर पर बैठा वह बस चुपचाप आंखों से आंसू बहा रहा है। वहीं, रिश्तेदारों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। 20 दिन पहले ही परिवार ने प्रसव के दौरान एक बेटी को खोया था और अब यह हादसा पूरे कुनबे पर पहाड़ बनकर टूटा है।
हितेश ने बताया कि उसने मोबाइल से लोकेशन भेजी और मदद के लिए कॉल किया। इसी पर मछुआरे अब्दुल जब्बार नाव लेकर पहुंचे और कई जिंदगियां बचाईं। लेकिन वह स्वीकार करता है कि उस रात का मंजर जिंदगी भर उसकी आंखों के सामने से नहीं जाएगा।
गांव में अंतिम संस्कार के दौरान ऐसा माहौल था मानो पूरा कानाखेड़ा शोक में डूब गया हो। ममता के पिता की चीखें और मासूम बच्चों की मासूमियत ने हर किसी का दिल छलनी कर दिया।

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