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चित्तौड़गढ़ जिले का सुठाला गांव बना टापू, 800 ग्रामीण फंसे

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चित्तौड़गढ़ जिले का सुठाला गांव बना टापू, 800 ग्रामीण फंसे

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बीमार लोगों को ट्यूब के जरिए ले जाया जाता है
चित्तौड़गढ़, 30 अगस्त

चित्तौड़गढ़ जिले की लुहारिया पंचायत का सुठाला गांव इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है। करीब 800 की आबादी वाला यह गांव पिछले दो महीनों से चारों तरफ से पानी में घिरा हुआ है। टूटी पुलियाओं और बहते पानी के बीच ग्रामीण भगवान भरोसे जीवन बिता रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि बीमार और गर्भवती महिलाओं को ट्यूब के सहारे नदी पार कर अस्पताल ले जाना पड़ रहा है।
हर साल टूटती पुलिया, हर बार प्रशासन मौन
सुठाला गांव एक तरफ ब्राह्मणी नदी और दूसरी तरफ बड़े नाले से घिरा हुआ है। वर्ष 2024 की बारिश में ब्राह्मणी नदी पर बनी पुलिया टूट गई, वहीं दूसरी ओर पाड़ाझर नाले की पुलिया भी पहले से ही क्षतिग्रस्त थी। नतीजा यह है कि बरसात के दौरान गांव पूरी तरह से मुख्यालय से कट जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन हर साल सिर्फ खानापूर्ति करता है और फिर आंखें मूंद लेता है।
अस्थायी पुल भी बहा, हालात गंभीर
गांव के लोगों ने 4 जुलाई को लकड़ी से अस्थायी पुल बनाया था, लेकिन 2 दिन बाद ही वह तेज बहाव में बह गया। अब हालात यह हैं कि लोग जान जोखिम में डालकर 12 फीट गहरी नदी पार करते हैं। 28 अगस्त को एक महिला को गंभीर हालत में ट्यूब पर बैठाकर नदी पार कर अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
35 किलोमीटर दूर इलाज, प्रसव भी घरों में
गांव में प्राथमिक चिकित्सा सुविधा तक नहीं है। इलाज के लिए रावतभाटा, जो करीब 35 किलोमीटर दूर है, जाना पड़ता है। गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी गांव में ही कराई जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होगी, प्रशासन नहीं जागेगा।
प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल पुलिया टूटती है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं होता। जब परमाणु बिजलीघर के लिए मॉक ड्रिल की जाती है, तो गांव के इस संकट को नजरअंदाज क्यों किया जाता है? अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है?

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