भागवत बोले- संघ सरकार के फैसले नहीं लेता
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भाजपा और आरएसएस में मतभेद हो सकते हैं, मनभेद नहीं
नई दिल्ली। 28 अगस्त
भागवत ने कहा कि भाजपा और संघ में किसी प्रकार का विवाद नहीं है। हमारे सभी सरकारों के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। “हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन फैसले सरकार ही लेती है। यह कहना गलत है कि सरकार में सब कुछ संघ तय करता है।” उन्होंने साफ किया कि हमारे बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने पर दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम के अंतिम दिन गुरुवार को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कई अहम मुद्दों पर खुलकर विचार रखे।
75 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति को लेकर उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि मैं 75 साल की उम्र में रिटायर हो जाऊंगा। संघ जो कहेगा, वही करूंगा।” वहीं, पीएम-सीएम को जेल जाने पर पद से हटाने वाले नए बिल पर उन्होंने कहा कि नेताओं की छवि साफ होनी चाहिए। कानून बने या न बने, यह संसद तय करेगी।
मुख्य बिंदु:
- हिंदू-मुस्लिम एकता पर: भागवत ने कहा कि हिंदू और मुस्लिम पहले से एक हैं, केवल पूजा-पद्धति अलग है। समाज में जो डर भरा गया है, उसे दूर करना होगा।
- जनसंख्या नीति पर: परिवारों में तीन से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए। हिंदुओं में जन्म दर तेजी से घट रही है, जिस पर चिंता जताई।
- घुसपैठ पर: देश में अवैध घुसपैठ नहीं होनी चाहिए। परमिशन लेकर ही कोई आए।
- शहरों के नाम बदलने पर: आक्रांताओं के नाम नहीं होने चाहिए, पर इसका मतलब यह नहीं कि मुसलमानों के नाम नहीं हों।
- अखंड भारत पर: यह एक राजनीतिक विचार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भावना है।
- शिक्षा नीति पर: नई शिक्षा नीति में पंचकोशीय शिक्षा महत्वपूर्ण है। अंग्रेजी का विरोध नहीं, लेकिन हिंदी और संस्कृत को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
भागवत ने कहा कि संघ शांति का पक्षधर है, लेकिन आत्मरक्षा के लिए हथियारों की जरूरत है। काशी-मथुरा आंदोलनों पर उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर आंदोलन को छोड़कर संघ अन्य आंदोलनों में शामिल नहीं होगा।
