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राजकीय सेटेलाइट अस्पताल और बीसीएमओ की नाक के नीचे संचालित थे अवैध क्लिनिक

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राजकीय सेटेलाइट अस्पताल और बीसीएमओ की नाक के नीचे संचालित थे अवैध क्लिनिक

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बड़गांव सेटेलाइट के बाहर मेडिकल स्टोरों पर संचालित अवैध क्लिनिकों पर अचानक पहुंचे सीएमएचओ
तीन मेडिकल स्टोरों के खिलाफ विभागीय और पुलिस कार्रवाई के निर्देश
उदयपुर, 5 नवम्बर:
शहर के करीबी बड़गांव स्थित राजकीय सैटेलाइट अस्पताल (पूर्व में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) के बाहर तीन मेडिकल स्टोरों पर लंबे समय से अवैध क्लीनिक संचालित किए जा रहे थे। सूचना पर बुधवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक आदित्य मौके पर पहुंचे। जांच में शिकायत सही पाई गई। जिसके बाद मौके पर जिला औषधि नियंत्रक और उनकी टीम बुलाई गई। विभागीय कार्रवाई के साथ ही पुलिस केस दर्ज कराए जाने के निर्देश दिए गए।
बताया गया कि विकास मेडिकल एंड लेबोरेटरी पर तारा नामक महिला मरीजों का उपचार करती मिली, जिसके पास चिकित्सक की डिग्री नहीं थी। सीएमएचओ के मांगे जाने पर वह किसी तरह का दस्तावेज प्रदर्शित नहीं कर पाई, जिसके बाद उन्होंने मौके पर मौजूद बड़ गांव ब्लॉक बीसीएमओ डॉ. अरुण सिंह और सैटेलाइट अस्पताल के डॉ. आशीष शर्मा को मौके पर बुलाया और रिपोर्ट बनाए जाने के साथ कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस केस दर्ज कराए जाने के भी आदेश दिए।


मेडिकल स्टोरों पर मरीजों का उपचार, ड्रिप चढ़ाई जा रही थी
सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि विकास मेडिकल एंड लेबोरेटरी और उससे सटे दो अन्य हार्दिक मेडिकल स्टोर और आर के मेडिकल स्टोरों की भी जांच की गई। तीनों ही जगह मरीजों के ड्रिप और इंजेक्शन लगाए जा रहे थे। जबकि मरीजों को इंजेक्शन और ड्रिप चढ़ाने का काम वैध क्लीनिक पर ही किया जाता है, यहां पूरी तरह अवैध रूप से किया जा रहा था। तीनों मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट उपस्थित नहीं थे। उन्होंने तीनों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी है। तीनों ही मेडिकल स्टोरों के संचालकों के पास चिकित्सा करने का कोई लाइसेंस और डिग्री नहीं मिली। सीएमएचओ ने ड्रग इंस्पेक्टर कुलदीप यदुवंशी, नेहा बंसल और सूर्यवीर को तीनों मेडिकल स्टोर के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए।


सैटेलाइट अस्पताल का नर्सिंग आॅफिसर भी करता है घर में प्रैक्टिस
सैटेलाइट अस्पताल के मरीजों ने बताया कि अस्पताल में उन्हें दोपहर एक बजे तक ही सेवा मिलती है। इसके बाद जांच या ड्रिप चढ़ाने से अस्पताल में इंकार कर दिया जाता है। जिसके बाद उन्हें बाहर जाने की मजबूरी रहती है। अस्पताल के पास मेडिकल स्टोरों पर ही नहीं, बाहर सैटेलाइट अस्पताल के नर्सिंग आॅफिसर का भी मकान है, जो वहां प्रैक्टिस करता है और मरीजों का उसके पास जाना मजबूरी होता है।

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