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विश्व आदिवासी दिवस पर डूंगरपुर में उमड़ा जनसैलाब, नेताओं के तीखे बयान

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विश्व आदिवासी दिवस पर डूंगरपुर में उमड़ा जनसैलाब, नेताओं के तीखे बयान

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ईसाई धर्म का प्रसार करने वाले आदिवासी परिवार का हिस्सा नहीं: भंवर परमार
मुख्यमंत्री ने अभी तक विश्व आदिवासी दिवस की बधाई नही दी, नागपुर से संदेश नही आया : राजकुमार रोत

उदयपुर। 9 अगस्त
डूंगरपुर जिला मुख्यालय स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में विश्व आदिवासी दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़ और गुजरात के सैकड़ों गांवों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाजजन पहुंचे। परंपरागत वेशभूषा, तीर-कमान, ढोल, नगाड़ा और गोफण के साथ निकले जुलूस ने पूरे शहर को आदिवासी रंग में रंग दिया। सुबह से ही वाहनों की लंबी कतारें और भीड़भाड़ के कारण कई जगह ट्रैफिक जाम रहा। कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी महापुरुषों की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद घंटों तक सांस्कृतिक और रंगारंग प्रस्तुतियां चलीं। मंच पर सांसद राजकुमार रोत, विधायक उमेश डामोर, अनिल कटारा, दिग्विजय सिंह चुंडावत, ओबीसी अधिकारी मंच नरेश पटेल और अनुतोष रोत सहित कई लोग मौजूद रहे।
भंवर परमार का दो टूक संदेश
आदिवासी समाज के वरिष्ठ नेता भंवरलाल परमार ने सख्त लहजे में कहा— “जो आदिवासी होकर क्रिश्चियन धर्म का प्रचार-प्रसार करता है, वह आदिवासी परिवार का हिस्सा नहीं है।” उन्होंने समाज से अपील की कि शराब पीना, झगड़े करना, सोशल मीडिया पर गलत टिप्पणियां करना और खतरनाक बाइक राइडिंग जैसी आदतें छोड़नी होंगी। परमार ने चेताया कि जो लोग इन आदतों में लिप्त हैं, वे खुद को आदिवासी परिवार का सदस्य कहने के हकदार नहीं होंगे। उन्होंने संस्कृति और परंपरा की रक्षा के लिए कठोर फैसलों की आवश्यकता बताई।
राजकुमार रोत का सीधा हमला
सांसद राजकुमार रोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा— “मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने तक विश्व आदिवासी दिवस की बधाई नहीं दी। प्रधानमंत्री मोदी हर छोटे-बड़े दिवस की बधाई देते हैं, लेकिन हमारे दिवस पर नहीं। इसका मतलब साफ है कि नागपुर मुख्यालय से बधाई नहीं देने का संदेश आया होगा।” रोत ने कहा कि सरकार ने सागवाड़ा में 27 लाख रुपये खर्च कर राज्य स्तरीय कार्यक्रम किया, लेकिन उसमें 500 लोग भी नहीं पहुंचे, जबकि डूंगरपुर में हजारों की भीड़ उमड़ी। उन्होंने चेतावनी दी कि आदिवासी समाज अब राजनीतिक उपेक्षा बर्दाश्त नहीं करेगा।
उमेश डामोर का शिक्षा पर जोर
विधायक उमेश डामोर ने कहा कि पहले आदिवासी समाज को असंगठित बताया जाता था, लेकिन अब उसकी एकजुटता सिद्ध हो चुकी है। उन्होंने कहा— “एक रोटी कम खाएं, लेकिन बच्चों को पढ़ाएं ताकि वे IAS-IPS बनकर समाज का भविष्य बदलें।” डामोर ने शिक्षा को अधिकार और पहचान की सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार बताया।

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