उदयपुर में 128 ट्रैप कैमरों से हो रही तेंदुओं की गिनती
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उदयपुर, 26 दिसम्बर: अरावली की पहाड़ियों में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में वन विभाग को एक अहम सफलता मिली है। उदयपुर वन मंडल में तेंदुओं की सटीक संख्या जानने के लिए विभाग द्वारा 128 ट्रैप कैमरों की मदद से की जा रही गणना का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। बाघदरा, सज्जनगढ़ और जयसमंद क्षेत्रों में यह प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है, जबकि अब इसका अगला चरण फुलवारी की नाल अभयारण्य में शुरू किया जा रहा है।
वन विभाग ने तेंदुओं की निगरानी और गणना के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए कुल 128 ट्रैप कैमरे विभिन्न वन क्षेत्रों में लगाए हैं। जयसमंद क्षेत्र में सर्वाधिक 84 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं, जहां तेंदुओं की सक्रियता अधिक मानी जाती है। वहीं सज्जनगढ़ क्षेत्र में 22 और बाघदरा क्षेत्र में 12 ट्रैप कैमरों से निगरानी की गई। इसके अतिरिक्त अमरख महादेव क्षेत्र में अभी गणना का कार्य प्रगति पर है।
इन ट्रैप कैमरों के जरिए तेंदुओं की आवाजाही, उनके व्यवहार और गतिविधियों के महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए हैं। कैमरों में कैद तस्वीरों और वीडियो फुटेज को विश्लेषण के लिए जयपुर भेजा जाएगा। वहां विशेषज्ञ तेंदुओं के शरीर पर मौजूद विशिष्ट धारियों, जिन्हें रोसेट पैटर्न कहा जाता है, के आधार पर उनकी वैज्ञानिक पहचान करेंगे। प्रत्येक तेंदुए का रोसेट पैटर्न अलग होता है, ठीक उसी तरह जैसे इंसानों के फिंगरप्रिंट, जिससे किसी भी तेंदुए की दोबारा गिनती की संभावना नहीं रहती।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस गणना से केवल तेंदुओं की संख्या ही सामने नहीं आएगी, बल्कि यह भी स्पष्ट होगा कि किस क्षेत्र में उनकी मौजूदगी अधिक है और उनकी मूवमेंट किस दिशा में होती है। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही तेंदुओं की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण और भविष्य की कार्य योजनाओं को मजबूत आधार मिलेगा।
अधिकारियों का कहना है कि फुलवारी की नाल और शेष क्षेत्रों में गणना पूरी होने के बाद उदयपुर के वन्यजीव परिदृश्य की एक वास्तविक और स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, जो संरक्षण प्रयासों को नई दिशा देगी।
