आयड़ नदी में अभी भी गिर रहे 139 नाले
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प्रदूषण से उदयसागर झील की स्थिति सबसे खराब
सुभाष शर्मा
उदयपुर। 12 सितम्बर
झीलों की नगरी उदयपुर की जीवनरेखा कही जाने वाली आयड़ नदी अब प्रदूषण का बड़ा कारण बन गई है। करीब 22 किलोमीटर लंबी इस नदी में शहर के 139 नालों का गंदा पानी गिर रहा है। यह पानी सीधे उदयसागर झील में पहुंचकर उसकी जल गुणवत्ता को लगातार खराब कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीवरेज और औद्योगिक कचरे के चलते झील का पानी पीने लायक तो दूर, जीव-जंतुओं के लिए भी खतरनाक होता जा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जुलाई 2024 की रिपोर्ट के अनुसार आयड़ नदी में untreated, partially treated और fully treated सीवेज का प्रवाह लगातार हो रहा है। उदयपुर में 20, 25, 10 और 5 MLD क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। इनमें से कुछ का पानी उद्योगों को दिया जाता है, लेकिन शेष सीधे नदी में छोड़ दिया जाता है। इससे नदी और झील में आयरन, सीसा (Pb), क्रोमियम (Cr) और निकल (Ni) जैसी भारी धातुएं मानक स्तर से कई गुना अधिक पाई गई हैं।
अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि आयड़ नदी और उदयसागर झील में BOD, COD और TDS जैसे प्रदूषण संकेतक बेहद उच्च स्तर पर हैं। पानी में घुली ऑक्सीजन (DO) घट रही है, जबकि नाइट्रेट और फॉस्फेट की मात्रा बढ़ रही है। यह स्थिति जल-जीवों के लिए घातक है और आसपास के भू-जल को भी दूषित कर रही है।
उदयसागर झील में कुल कोलीफॉर्म और फीकल कोलीफॉर्म का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। वर्ष 2013 से 2016 के बीच यहां कोलीफॉर्म की मात्रा 560 से 645 MPN/100ml पाई गई। झील का BOD स्तर 3.14 से 3.78 mg/L तक दर्ज हुआ, जो स्वच्छ जल मानकों से अधिक है। आयड़ नदी और उदयसागर झील में बढ़ते जल प्रदूषण से भूमिगत जल भी प्रदूषित होने लगा है, जिससे लीवर, हृदय और अग्नाशय का रोग बढ़ रहा है।
इस मामले में झील संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. अनिल मेहता ने आयड़ नदी एवं उदयसागर झील में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि नदी और झील में गिर रहे प्रदूषण पर रोक लगाया जाना आवश्यक है। जिस तरह आयड़ नदी के पांच किलोमीटर के एरिया में गिरते सीवरेज को रोका गया, उसी तरह बाकी को भी रोका जाना चाहिए। उन उद्योगों को भी पाबंद करें, जिनका पानी बिना ट्रीटमेंट किए नदी में गिर रहा।
