प्रतापगढ़ कलेक्टर और उदयपुर सांसद में ठनी
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डीएमएफटी फंड और मर्यादा को लेकर मुख्य सचिव तक पहुंचा मामला
प्रतापगढ़, 25 दिसम्बर: प्रतापगढ़ जिले में कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया और उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत के बीच चल रहा प्रशासनिक टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। सांसद द्वारा मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र के जवाब में कलेक्टर ने भी विस्तृत प्रतिवेदन भेजते हुए सांसद के आरोपों को तथ्यों के विपरीत बताया है। कलेक्टर ने न केवल डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) फंड से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया, बल्कि पत्राचार की भाषा, मर्यादा और एक महिला अधिकारी की गरिमा से जुड़े गंभीर सवाल भी उठाए हैं।
मुख्य सचिव को भेजे अपने पत्र में कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने लिखा कि सांसद मन्नालाल रावत स्वयं पूर्व में राजकीय राजपत्रित अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी है। इसके बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को तथ्यों के विपरीत एवं अशासकीय भाषा में पत्र प्रेषित किया। कलेक्टर ने इसे एक महिला अधिकारी की छवि धूमिल करने और मानसिक मनोबल कमजोर करने की नीयत से किया गया कृत्य बताया।
कलेक्टर ने सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा कार्मिक विभाग के दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी, विशेषकर महिला अधिकारी के संदर्भ में पत्राचार करते समय भाषा और मर्यादा का पालन अनिवार्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधि किसी अधिकारी के स्थानांतरण, चार्जशीट या पदस्थापन की मांग नहीं कर सकते, क्योंकि यह प्रक्रिया सीसीए और आरएसआर नियमों के तहत निर्धारित प्रशासनिक हेरारकी से ही संभव है।
कलेक्टर ने डीएमएफटी से जुड़े तथ्यों को विस्तार से रखते हुए बताया कि 21 नवम्बर 2024 को हुई गवर्निंग काउंसिल की बैठक में 60 कार्यों में से 54 को तकनीकी, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी गई। वित्त (मार्गोपाय) विभाग के निर्देशानुसार 23 अप्रैल 2025 को प्रस्ताव सक्षम स्वीकृति के लिए भेजा गया। इसके बाद 3 दिसम्बर 2025 को धरियावद विधानसभा क्षेत्र के चार कार्यों के लिए 20.06 लाख रुपये की राशि कार्यकारी एजेंसी को हस्तांतरित की जा चुकी है।
क्षेत्रीय संतुलन का मुद्दा
कलेक्टर ने पत्र में उल्लेख किया कि प्रतापगढ़ जिले की 8 पंचायत समितियों में से केवल धरियावद उदयपुर लोकसभा क्षेत्र में आती है, जबकि पीपलखूंट बांसवाड़ा और शेष 6 पंचायत समितियां चित्तौड़गढ़ संसदीय क्षेत्र में हैं। इसके बावजूद डीएमएफटी की अधिकांश राशि अपने क्षेत्र में उपयोग करवाने का दबाव अनुपातिक वितरण के सिद्धांत के विरुद्ध है। विवाद पर सांसद मन्नालाल रावत ने कहा कि इस विषय में कुछ कहने से बखेड़ा खड़ा हो जाएगा। जनता की मांग स्वाभाविक है और विकास कार्यों के लिए आवाज उठाना जनप्रतिनिधि का धर्म है। वहीं सीकर में कलेक्टर–मंत्री विवाद को लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसे प्रदेश में बेलगाम नौकरशाही का उदाहरण बताया।
