उदयपुर से हैदराबाद तक बना ग्रीन कॉरिडोर, निधन के बाद फेफड़े दान
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अब दो जिंदगियों को जीवन की बंधी उम्मीद
उदयपुर, 21 दिसंबर: उदयपुर में एक परिवार ने दु:ख की घड़ी में मानवता और संवेदना की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने अंगदान को लेकर समाज में नई प्रेरणा को स्थापित किया। चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं निवासी 53 वर्षीय कानसिंह नाथावत के निधन के बाद उनके परिवार ने उनके फेफड़े दान करने का निर्णय लिया, जिससे दो गंभीर मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है।
कानसिंह नाथावत को 14 दिसंबर को ब्रेन स्ट्रोक आने के बाद उदयपुर के एमबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान शनिवार देर रात उनका निधन हो गया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन और ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर टीम ने परिजनों से अंगदान को लेकर चर्चा की। परिजनों ने बिना देर किए सहमति जताई।
मृतक के बड़े बेटे रजत सिंह ने भावुक होकर कहा कि पिता भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके अंगों के जरिये वे किसी और में जीवित रहेंगे। वहीं पत्नी सुनीता देवी ने बताया कि उनके परिवार में फेफड़ों की बीमारी का दर्द पहले से देखा है, इसलिए उन्होंने चाहा कि उनके पति के फेफड़े किसी जरूरतमंद के काम आएं।
रविवार को आरएनटी मेडिकल कॉलेज से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर फेफड़ों को पुलिस सुरक्षा में डबोक एयरपोर्ट पहुंचाया गया, जहां से चार्टर विमान द्वारा हैदराबाद के किम्स अस्पताल भेजा गया। पूरे सम्मान के साथ डॉक्टरों और स्टाफ ने दिवंगत को पुष्पांजलि अर्पित कर अंतिम विदाई दी।
आरएनटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विपिन माथुर ने बताया कि यह उदयपुर में किया गया दूसरा सफल फेफड़ा दान है, जिससे दो मरीजों की जान बच सकती है। उन्होंने आमजन से अपील की कि भ्रांतियों को दूर कर अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आएं, क्योंकि यही सच्ची मानव सेवा है।
