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सागवाड़ा नगरपालिका अध्यक्ष पद पर सियासी संग्राम, दोनों अध्यक्ष सीट पर डटे

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सागवाड़ा नगरपालिका अध्यक्ष पद पर सियासी संग्राम, दोनों अध्यक्ष सीट पर डटे

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एक टेबल, दो कुर्सियां: कांग्रेस-भाजपा समर्थित अध्यक्ष आमने-सामने
डूंगरपुर, 15 जनवरी:
डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा नगरपालिका में अध्यक्ष पद को लेकर राजनीतिक घमासान चरम पर पहुंच गया है। हालात ऐसे बन गए कि पालिका कार्यालय में अध्यक्ष की एक ही टेबल पर दो कुर्सियां लगा दी गईं और दोनों प्रमुख दलों के नेता खुद को अध्यक्ष बताते नजर आए। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ प्रशासन को असमंजस में डाला है, बल्कि नगर की राजनीति को भी गरमा दिया है।
हाईकोर्ट से स्टे के बाद बदले हालात
करीब 9 महीने से निलंबित कांग्रेस नेता नरेंद्र खोड़निया को हाईकोर्ट से निलंबन पर स्टे मिलने के बाद बुधवार को उन्होंने पालिका पहुंचकर अध्यक्ष की कुर्सी संभाल ली। खोड़निया ने कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए खुद को पुनः अध्यक्ष बताया। वहीं नगर पालिका आयुक्त मोहम्मद सोहिल शेख ने इस पूरे मामले में राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगे जाने की बात कही।
गुरुवार को आमने-सामने बैठे दोनों अध्यक्ष
गुरुवार सुबह कार्यालय खुलते ही कांग्रेस के नरेंद्र खोड़निया और भाजपा समर्थित अध्यक्ष आशीष गांधी दोनों पालिका पहुंच गए। इसके बाद अध्यक्ष की टेबल पर पास-पास दो कुर्सियां रखी गईं। एक पर खोड़निया तो दूसरी पर आशीष गांधी बैठ गए। दोनों ने खुद को वैध अध्यक्ष बताते हुए कामकाज संभालने का दावा किया। इसी बीच खोड़निया के नाम की अध्यक्षीय नेम प्लेट भी कार्यालय के बाहर लगा दी गई।
दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क
नरेंद्र खोड़निया का कहना है कि हाईकोर्ट के स्टे आदेश के बाद वे स्वतः अध्यक्ष पद पर बहाल हो गए हैं। वहीं आशीष गांधी ने कहा कि जब तक सरकार की ओर से स्पष्ट आदेश नहीं आते, वे अध्यक्ष बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार उन्हें पद छोड़ने का निर्देश देती है तो वे तत्काल इस्तीफा दे देंगे।
निलंबन से नियुक्ति तक का पूरा घटनाक्रम
दरअसल, वर्ष 2017 में बने सागवाड़ा नगरपालिका भवन को गिराने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में 10 अप्रैल 2025 को सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष नरेंद्र खोड़निया और उपाध्यक्ष मोहम्मद इस्माइल घांची को निलंबित कर दिया था। इसके बाद 2 मई 2025 को भाजपा पार्षद आशीष गांधी को अध्यक्ष मनोनीत किया गया। करीब 9 महीने बाद अब स्टे आदेश के साथ खोड़निया की वापसी ने एक बार फिर सागवाड़ा नगरपालिका को सियासी अखाड़ा बना दिया है।

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