चित्तौड़गढ़ में दिखा दुर्लभ पेंगोलिन
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‘जीवित कवच’ कहा जाने वाला चींटीखोर जीव लोगों में बना चर्चा का विषय
चित्तौड़गढ़, 2 नवम्बर (विजन 360 न्यूज डेस्क): चित्तौड़गढ़ शहर में इन दिनों एक दुर्लभ जीव पेंगोलिन (चींटीखोर) लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर के कुंभा नगर और शास्त्री नगर क्षेत्रों में इसे कई बार देखा गया। यह पहली बार है जब शहर की सड़कों पर पेंगोलिन दिखाई दिया। स्थानीय लोगों ने इसके वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी साझा किए।
वन विभाग के अनुसार, पेंगोलिन दक्षिणी राजस्थान के जंगलों, विशेषकर सीतामाता सेंचुरी में पाया जाता है। इसका शरीर कठोर शल्कों (scales) से ढका होता है और खतरा महसूस होते ही यह खुद को गेंद की तरह सिकोड़ लेता है। यही कारण है कि इसे जंगल का “जीवित कवच” कहा जाता है।
रेंजर प्रशांत शर्मा ने बताया कि पेंगोलिन मुख्यतः दीमक और चींटियां खाता है। इसकी लंबी चिपचिपी जीभ शिकार पकड़ने का हथियार होती है। यह निशाचर और शर्मीला जीव है जो रात में सक्रिय रहता है।
सहायक वन संरक्षक राम मोहन मीणा ने बताया कि पेंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की शेड्यूल फर्स्ट कैटेगरी में शामिल है। इसका शिकार या व्यापार कानूनी अपराध है। जंगलों का यह “प्राकृतिक सफाईकर्मी” कीटों की आबादी नियंत्रित कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखता है।
