फर्जी कोर्ट रूम बनाकर रिटायर्ड कर्मचारी से 33.60 लाख की ठगी
Share
CBI अधिकारी बताकर दी धमकियां, कहा- जज के सामने दरवाजा खोलने से पहले भी अनुमति लेनी होगी
उदयपुर, 30 नवम्बर: शहर में साइबर ठगों ने धोखाधड़ी का नया तरीका अपनाते हुए हिंदुस्तान जिंक से रिटायर्ड 61 साल के बुजुर्ग से 33.60 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने उन्हें पुलिस और CBI अधिकारी बनकर झांसा दिया और वीडियो कॉल पर फर्जी कोर्ट रूम तैयार कर ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ में ले लिया। मामला उजागर होने पर पीड़ित ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एडीजे कुलदीप शर्मा को शिकायत दी, जिनके निर्देश पर IG ने मामले में कार्रवाई कर साइबर थाने में केस दर्ज कराया।
5 से 7 घंटे तक घर में कैद रखा
रिपोर्ट के मुताबिक 12 नवंबर की सुबह 9 बजे बुजुर्ग (बदला नाम – दुर्गेश शर्मा) को ‘ट्राय अथॉरिटी न्यू दिल्ली’ के नाम से कॉल आया। कॉलर ने कहा कि उनके आधार कार्ड से जारी सिम से 2 करोड़ के 40 ट्रांजैक्शन हुए हैं। बाद में उन्हें वॉट्सएप वीडियो कॉल पर एक पुलिस वर्दीधारी शख्स से जोड़ा गया, जिसने खुद को CBI अधिकारी बताया और कहा कि यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है। फोन सर्विलांस पर होने की बात कहते हुए उन्होंने बुजुर्ग को घर से न निकलने, किसी अन्य कॉल को रिसीव न करने और बिना अनुमति दरवाजा तक न खोलने का आदेश दिया। ठगों ने पीड़ित के फोन से वॉट्सएप छोड़कर सभी ऐप डिलीट करवा दिए और कहा कि उन्हें जल्द ही ‘जज साहब’ के सामने पेश किया जाएगा।
फर्जी कोर्ट में पेशी, पूरी संपत्ति का ब्यौरा मांगा
13 नवंबर को वीडियो कॉल पर फर्जी कोर्ट रूम बनाया गया, जिसमें ऑनलाइन ‘पेशी’ करवाई गई। पीड़ित से बैंक पासबुक, जमा राशि, शेयर और संपत्ति की पूरी डिटेल वॉट्सएप पर फोटो खिंचवाकर मांगी गई। इस दौरान गिरफ्तारी और सजा की धमकी दी गई और ‘क्लीन चिट’ के बदले पैसे मांगे गए।
33.60 लाख रुपए हड़प लिए
14 नवंबर को दबाव में बुजुर्ग ने 18.10 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। 15 नवंबर को 8.50 लाख और भेजे। 18 नवंबर को आए कॉल पर ठगों ने शेयर बेचने के लिए मजबूर किया। एसबीआई सिक्योरिटी के 1.70 लाख और एमके ग्लोबल के 5.94 लाख के शेयर बिकवा लिए। 20 नवंबर को बुजुर्ग ने और 7 लाख रुपए भेजे। कुल मिलाकर ठग 33.60 लाख रुपए ले उड़े। 25 नवंबर को फिर कॉल आया, तब बुजुर्ग को ठगी का शक हुआ और उन्होंने परिवार को बताया, जिसके बाद मामला खुला।
पीड़ित ने जिला सेवा प्राधिकरण से लगाई गुहार
25 नवंबर को पीड़ित ने एडीजे कुलदीप शर्मा से मिलकर पूरी घटना बताई। एडीजे ने IG को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। 28 नवंबर को साइबर थाने में मामला दर्ज हुआ। साइबर थानाधिकारी रामनिवास ने बताया कि यह डिजिटल अरेस्ट का मामला है। तकनीकी आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।
