आचार्य महाश्रमण का नगर में भव्य स्वागत, जनसैलाब ने पलक-पावड़े बिछाकर दिया सम्मान
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ढाई घंटे की विहार यात्रा में हजारों श्रद्धालु साथ चले; महाप्रज्ञ विहार पहुंचते ही जयकारों से गूंज उठा परिसर, धर्मसभा में आचार्य ने आत्मबल और साहस का संदेश दिया
उदयपुर, 25 नवम्बर: तेरापंथ जैन समाज के आचार्य महाश्रमण का शहर में मंगलवार को भव्य स्वागत किया गया। प्रात: 7.15 बजे हिरणमगरी सेक्टर-4 स्थित तुलसी निकेतन से शुरू हुई विहार यात्रा में हजारों श्रद्धालु साथ जुड़े। मार्ग में 100 फीट रोड और विश्वविद्यालय मार्ग सहित विभिन्न इलाकों से आए समाजजनों ने पलक-पावड़े बिछा कर आचार्य का स्वागत किया। धवल सेना के साथ आगे बढ़ती शोभायात्रा में भक्तों की लगातार बढ़ती भीड़ उल्लेखनीय रही।
वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक पगारिया ने बताया कि शोभागपुरा स्थित जूडियो शो-रूम व शुभकेसर गार्डन पर आचार्यश्री की विशेष अगवानी की गई। इसके बाद हजारों लोगों का कारवां अहिंसा यात्रा के रूप में महाप्रज्ञ विहार तक पहुंचा। विहार मार्ग पर लगाए गए अनेक स्वागत द्वारों पर समाजजन समूहों में खड़े रहे और आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर महाप्रज्ञ विहार को विशेष रूप से सजाया गया। पंचरंगी जैन ध्वजाओं से सुसज्जित विशाल पांडाल में प्रवेश करते ही जय-जय ज्योति चरण और जय-जय महाश्रमण के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग सामयिक स्थल बनाए गए। आयोजन में तेरापंथ सभा, युवक परिषद, महिला मंडल, प्रोफेशन फोरम, अणुव्रत समिति सहित कई संस्थाओं का सहयोग रहा।
धर्मसभा में आचार्य महाश्रमण ने संदेश दिया कि जहां विरोध हो, उसे विनोद की तरह स्वीकार करना चाहिए। जीवन में कठिनाइयों के बावजूद आत्मबल और मनोबल बनाए रखना जरूरी है। कठिनाइयों से डरकर पीछे हटने वाले लोग सफल नहीं हो पाते, जबकि साहस और धैर्य रखने वाले ही विजयी होते हैं।
अपरान्ह में महाराणा मेवाड़ विश्वराजसिंह के नेतृत्व में 50 से अधिक राव-उमरावों ने आचार्यश्री से भेंट की। इसी कड़ी में बुधवार अपरान्ह 3.30 बजे आचार्य महाश्रमण महाप्रज्ञ विहार से सुखेर के लिए विहार करेंगे और रात्रि विश्राम तेरापंथ सभा अध्यक्ष कमल नाहटा के प्रतिष्ठान पर करेंगे।
