रहो भीतर और जियो बाहर का सिद्धांत अपनाना ही श्रेयस्कर जीवन : महाश्रमण
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उदयपुर, 9 नवम्बर: तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण अपनी धवल वाहिनी के साथ मेवाड़ की ओर विहार करते हुए रविवार को ताजपुर से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी तय कर अवर ऑन हाई स्कूल, प्रांतीज पहुंचे।
श्री मेवाड़ जैन श्वेताम्बर तेरापंथी कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष राजकुमार फत्तावत ने बताया कि विहार मार्ग में जगह-जगह श्रावक-श्राविकाओं और ग्रामीणों ने उनका स्वागत किया।
इस अवसर पर आचार्य महाश्रमण ने अमृत देशना में कहा कि व्यक्ति को अनित्य जीवन में नित्य आत्मा के लिए धर्म का संचय करना चाहिए। धर्म ही जीवन की सच्ची पूंजी है। उन्होंने कहा कि अहिंसा, नशा मुक्ति और सद्भावना अपनाने से जीवन सफल बनता है। रहो भीतर और जियो बाहर का सिद्धांत ही श्रेष्ठ जीवन का मार्ग है।
आचार्य ने बताया कि यह वर्ष तेरापंथ के प्रथम प्रवर्तक आचार्य भिक्षु की 300वीं जयंती तथा नवम आचार्य तुलसी की दीक्षा शताब्दी के रूप में विशेष महत्व रखता है। वहीं, साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा ने कहा कि आचार्य महाश्रमण पिछले एक वर्ष से गुजरात में नैतिकता और सद्भावना का संदेश दे रहे हैं।
इस दौरान प्रांतीज विधायक गजेन्द्र सिंह, पूर्व सांसद दीपसिंह राठौड़, तेरापंथी सभा पदाधिकारी, साध्वियां एवं ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।
मार्ग सेवा में किशनलाल डागलिया, बलवंत रांका, सूर्यप्रकाश मेहता, प्रवीण ओस्तवाल, विनोद मांडोत सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता की। अंत में मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
