बाघों को बफर से कोर जोन में लाया जाएगा
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टाइगर आउटसाइड प्रोजेक्ट : राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा बोले—राज्य में भी लागू होंगे सख्त संरक्षण उपाय
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 8 दिसंबर: देश में तेजी से बढ़ती वन्यजीव आबादी और मानव–वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए वन मंत्रालय एक अहम कदम उठाने जा रहा है। टाइगर आउटसाइड प्रोजेक्ट के तहत अभयारण्यों के बफर जोन में घूम रहे बाघों को व्यवस्थित तरीके से वापस कोर जोन में स्थानांतरित किया जाएगा। शुरुआत राजस्थान के साथ मध्य प्रदेश और उत्तराखंड के चुनिंदा अभयारण्यों से की जा रही है।
भोजन उपलब्धता की होगी जांच
विशेषज्ञों के अनुसार बाघ अक्सर अपने पसंदीदा शिकार की कमी या बफर जोन में पालतू पशुओं की आसान उपलब्धता के कारण कोर क्षेत्र से बाहर आ जाते हैं। इसीलिए स्थानांतरण से पहले कोर जोन में शिकार प्रजातियों की उपलब्धता का सर्वे किया जाएगा। जहां कमी होगी, वहां शिकार आधारित पारिस्थितिक सुधार किए जाएंगे। तमिलनाडु के सलीम अली सेंटर फॉर नेचुरल हिस्ट्री में एक विशेष एआई सेंटर बनाया गया है, जहां संघर्ष संभावनाओं का अध्ययन कर तकनीकी समाधान विकसित किए जा रहे हैं।
क्या है कोर जोन
किसी भी टाइगर रिजर्व के जंगल के बीचों-बीच वाला एरिया कोर जोन कहलाता है। कोर जोन में किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर मनाही होती है। इस एरिया के अंदर गांव या कोई आबादी रहती है तो केवल उन्हें ही आने-जाने का सिर्फ रास्ता होता है। किन्तु वे वहां ना तो मवेशियों को चरा सकते और ना ही लकड़ी ले सकते हैं। यहां तक की वे कोर एरिया में बिना परमिशन आ—जा भी नहीं सकते। इस एरिया में हर चीज पर प्रतिबंध होता है। इस तरह से कोर एरिया एक तरह से नर्सरी होती है, जिसमें वन्य प्राणियों को स्वतंत्र रूप से अपनी ब्रीडिंग करने यानि अपना कुनबा बढ़ाने के लिए, अनुकूल वातावरण मिलता है और साथ ही वन्य प्राणी पूरी तरह से सुरक्षित और स्वतंत्रता से रह सकें।
350 मनुष्य और 650 बाघों की मौत
मानव–बाघ संघर्ष की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2021 से सितंबर 2025 के बीच देश भर में लगभग 350 लोगों की और करीब 650 बाघों की मौत दर्ज की गई है। देश के 58 टाइगर रिज़र्व में वर्तमान अनुमानित संख्या 3682 से अधिक है, जिनमें से 40% बाघ बफर क्षेत्रों में पाए जा रहे हैं, जहां मानवीय गतिविधियां अधिक होती हैं।
राज्य में वन्यजीव संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता: संजय शर्मा
राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा का कहना है कि “बाघों और मानव के बीच संघर्ष को कम करना हमारी पहली जिम्मेदारी है। केंद्र की टाइगर आउटसाइड प्रोजेक्ट पहल का हम स्वागत करते हैं और राजस्थान में रणथंभौर व सरिस्का क्षेत्रों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। बफर से कोर जोन स्थानांतरण, शिकार प्रजातियों की बढ़ोतरी और तकनीकी निगरानी को मजबूत किया जाएगा।”
बाघों के बाद ‘पेंथरा’ जाति के अन्य जानवरों को किया जाएगा शिफ्ट
बफर जोन से कोर जोन में बाघों को शिफ्ट किए जाने की योजना के सफल होने पर पेंथरा जाति के अन्य जीवों को भी इसी तरह शिफ्ट किया जाएगा। पेंथरा जाति में बड़ी बिल्ली वंश के सभी जानवर आते हैं और इस वंश में शामिल तेंदुआ मेवाड़ में सर्वाधिक संख्या में पाए जाते हैं।
