“सहकार से समृद्धि” कांफ्रेंस में भूटानी का संदेश: समावेशी विकास के लिए सहकारिता को मजबूत करना जरूरी
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उदयपुर, 8 जनवरी: केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि देश में समृद्धि के लिए सहकारिता का मजबूत होना अनिवार्य है। उन्होंने नियमों का सरलीकरण, बैंकिंग प्रणाली में सुधार और संस्थाओं के बीच प्रभावी तालमेल को सहकारिता क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक बताया।
भूटानी गुरुवार को उदयपुर के होटल ताज अरावली में आयोजित दो दिवसीय “सहकार से समृद्धि” राष्ट्रीय कांफ्रेंस के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस कांफ्रेंस में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहकारिता सचिव व रजिस्ट्रार उपस्थित थे। उन्होंने गुजरात के बनासकांठा जिले के सफल सहकारिता मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि रेगिस्तानी क्षेत्र होने के बावजूद वहां वृक्षारोपण और डेयरी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई।
सहकारी बैंकों और राष्ट्रीय नीति पर जोर
डॉ. भूटानी ने अधिकारियों से जिले और गांवों का दौरा कर प्रत्यक्ष फीडबैक लेने, सहकारी बैंकों के बोर्ड के सुचारु संचालन और शाखा विस्तार पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारिता नीति के तहत राज्यों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार नीति को अनुकूलित कर इसे राष्ट्रीय नीति के साथ एकीकृत करना चाहिए।
सहकारिता क्षेत्र में भविष्य की दिशा
सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव सिद्धार्थ जैन ने कहा कि सहकारिता देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है और वर्ष 2047 तक इसका जीडीपी में योगदान तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य है। शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार आनन्दी ने बताया कि भारत में सहकारी आंदोलन अब केवल सुधारों के दौर से नहीं बल्कि नई कल्पना के दौर से भी गुजर रहा है, और वैश्विक व राष्ट्रीय परिदृश्य में सहकारी समितियां आर्थिक रूप से सशक्त इकाइयों के रूप में उभर रही हैं।
भविष्य की रणनीति पर मंथन
दो दिवसीय कांफ्रेंस में सहकारिता क्षेत्र की पहलों की समीक्षा की जा रही है और भविष्य की रणनीति पर व्यापक चर्चा की जा रही है। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव पंकज कुमार बंसल भी मंचासीन रहे।
