आदिवासी बेल्ट में पकड़ ढीली, बीजेपी ‘गौरव दिवस’ से करेगी सियासी रिकवरी की कोशिश
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भजनलाल शर्मा की 15 नवंबर को डूंगरपुर में सभा; बीएपी के बढ़ते प्रभाव को थामने की तैयारी
डूंगरपुर, 11 नवंबर: दक्षिण राजस्थान की आदिवासी राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों के बीच बीजेपी अब अपनी जमीन बचाने की जद्दोजहद में जुटी है। जनजाति गौरव दिवस के बहाने पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनाधार मजबूत करने का प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 15 नवंबर को डूंगरपुर के एसबीपी कॉलेज ग्राउंड में जनसभा करेंगे। यह सभा केवल ‘गौरव दिवस’ का मंच नहीं, बल्कि पार्टी की खोई सियासी पकड़ वापस लाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
बीएपी बना नई चुनौती, बीजेपी की चिंता बढ़ी
दक्षिण राजस्थान के डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) का तेजी से उभार बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। बीएपी के पास आसपुर से उमेश डामोर, चौरासी से अनिल कटारा, धरियावद से थावरचंद और सैलाना से कमलेश्वर डोडियार जैसे विधायक हैं। वहीं, सांसद राजकुमार रोत अब राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी राजनीति का चेहरा बन चुके हैं। जिस क्षेत्र को कभी बीजेपी का सुरक्षित गढ़ माना जाता था, वहां अब बीएपी की पकड़ मजबूत होती जा रही है। मुख्यमंत्री की आगामी सभा को बीएपी के इस बढ़ते प्रभाव को रोकने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
डूंगरपुर में पहली यात्रा, बीजेपी के लिए सियासी परीक्षा
मुख्यमंत्री बनने के बाद भजनलाल शर्मा पहली बार डूंगरपुर विधानसभा क्षेत्र में आ रहे हैं — यह वही सीट है जहां बीजेपी आजादी के बाद केवल एक बार, 2013 में देवेंद्र कटारा के रूप में जीत दर्ज कर सकी थी। वर्तमान में कांग्रेस के गणेश घोघरा विधायक हैं। लगातार दो चुनावों में हार, स्थानीय संगठन की निष्क्रियता और कार्यकर्ताओं की नाराजगी ने पार्टी के लिए हालात मुश्किल कर दिए हैं।
गुटबाजी, रुका बजट और नाराज कार्यकर्ता
बीजेपी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद उसकी अंदरूनी गुटबाजी और ठप विकास कार्य हैं। जनजाति विभाग का 1750 करोड़ रुपये का बजट अब तक जारी नहीं हुआ, जिससे योजनाएं प्रभावित हैं। पूर्व विधायक गोपीचंद मीणा खुले मंचों से सरकार की नीतियों और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा पर सवाल उठा चुके हैं। सागवाड़ा में पालिका अध्यक्ष चयन के बाद कार्यकर्ताओं के इस्तीफों की झड़ी और पंचायती राज चुनावों में देरी ने असंतोष और बढ़ाया है।

भव्य तैयारियों के बीच सियासी परीक्षा
एसबीपी कॉलेज ग्राउंड पर मंच, डोम और जनजातीय संस्कृति की प्रदर्शनी की तैयारियां तेज हैं। कलेक्टर अंकित कुमार सिंह की देखरेख में प्रशासन सभा को भव्य बनाने में जुटा है। हालांकि, सवाल यह है कि क्या ‘जनजाति गौरव दिवस’ की यह चमक आदिवासी इलाकों में जड़ जमा चुके असंतोष और बीएपी के उभार पर पर्दा डाल पाएगी? बीजेपी के लिए यह सभा अब सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि राजनीतिक “सेल्फ-रेस्क्यू मिशन” बन गई है।
