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बसों में सुरक्षा मानकों की उड़ रही धज्जियां

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बसों में सुरक्षा मानकों की उड़ रही धज्जियां

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आरटीओ की अनदेखी से यात्रियों की जान पर बन रही बात
उदयपुर, 17 अक्टूबर (राजेश वर्मा):
राज्य में स्लीपर और सामान्य बसों में सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ट्रैवल एजेंसियां मनमर्जी से बसों की बॉडी बढ़ाकर सीटें बढ़ा रही हैं, वहीं परिवहन विभाग और आरटीओ अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर आंख मूंदे बैठे हैं।
नियमों के अनुसार हर बस में दो दरवाजे आगे का मुख्य द्वार और पीछे आपातकालीन द्वार होना अनिवार्य है, परंतु अधिकांश बसों में आपातकालीन द्वार सिर्फ दिखावे के लिए है। कई संचालक इसे सीट लगाकर बंद कर देते हैं, जिससे आपात स्थिति में यात्रियों के निकलने का रास्ता ही नहीं बचता।
कमाई के लालच में कई बस संचालक कंपनी से आई स्वीकृत डिजाइन में फेरबदल कर अधिक सीटें और लदान की जगह बढ़ा रहे हैं। चेसिस से बड़ी बॉडी बनवाकर इन बसों को चलाया जा रहा है, जो यात्रियों की सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है।
आश्चर्य यह है कि परिवहन विभाग इन नियमविहीन बसों को न केवल रजिस्ट्रेशन दे रहा है, बल्कि इन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट तक जारी किए जा रहे हैं। अप्रैल से बंद पड़े मैकेनाइज्ड फिटनेस सेंटर की जगह अधिकारी स्वयं मैनुअल फिटनेस जांच कर रहे हैं, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो गई है।
सूत्रों के अनुसार बस संचालकों की मनमानी में विभागीय मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ज्ञानदेव ने सफाई देते हुए कहा कि “मामले की जांच के लिए विभागीय स्तर पर कमेटी गठित की गई है और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।”

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