चित्तौड़गढ़—प्रतापगढ़ दुग्ध संघ का बोर्ड भंग, जिला कलक्टर बने प्रशासक
Share
उदयपुर, 26 सितम्बर:चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड में लंबे समय से चल रही खींचतान और इस्तीफों के कारण आखिरकार बड़ा कदम उठाया गया। रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, राजस्थान, जयपुर ने आदेश जारी कर संघ के संचालक मंडल को भंग कर दिया है। अब जिले के कलक्टर को प्रशासक नियुक्त किया गया है, जो आगामी चुनाव तक संघ का प्रबंधन संभालेंगे।
कोरम पूरा न होने से मंडल अल्पमत में
दुग्ध संघ के उपनियमों के अनुसार मंडल में कुल 16 सदस्य होने चाहिए—12 निर्वाचित, 3 मनोनीत और पदेन सचिव। लेकिन लगातार इस्तीफों और पद रिक्त होने से हालात बिगड़ गए। 12 निर्वाचित सदस्यों में से 8 सदस्य पद से हट गए, जिससे मंडल में केवल 4 निर्वाचित और 4 मनोनीत सदस्य ही बचे। नियम के अनुसार बैठक का कोरम तभी पूरा होता है जब 50% से अधिक सदस्य उपस्थित हों, यानी कम से कम 9 सदस्य। मात्र 8 सदस्य बचे रहने से बैठकें और फैसले असंभव हो गए।
इस्तीफों और मनमानी के आरोप
12 सितम्बर की सुनवाई में तीन सदस्य जमनालाल, भैरूलाल और मदनलाल ने कहा कि मंडल मनमानी कर रहा था, इसलिए उन्होंने इस्तीफा दिया। अध्यक्ष बद्रीलाल जाट ने एक महीने का समय मांगा। 25 सितम्बर की अगली सुनवाई में तीन और सदस्य—उमा देवी, सीता देवी और सुमन देवी ने भी यही आरोप दोहराए और इस्तीफा दे दिया। इस बार अध्यक्ष नोटिस के बावजूद उपस्थित नहीं हुए। इस बीच हथियाना दुग्ध समिति में प्रशासक नियुक्त कर दिया गया और रेण का खेड़ा महिला ग्राम विकास दुग्ध समिति की अध्यक्ष को हटा दिया गया। इससे बोर्ड और कमजोर हो गया।
कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई
राजस्थान सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 2001 (संशोधित 2013) की धारा 30 (1)(ख) के तहत यदि किसी समिति में गतिरोध हो और कामकाज ठप हो जाए, तो रजिस्ट्रार को बोर्ड भंग कर प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार है। इसी धारा के तहत कार्रवाई करते हुए आदेश जारी किया गया।
कलक्टर को मिली जिम्मेदारी
रजिस्ट्रार मंजू राजपाल ने आदेश में कहा कि कोरम पूरा न होने से दुग्ध संघ का संचालन असंभव हो गया है। इसलिए मंडल भंग कर जिला कलक्टर को प्रशासक नियुक्त किया जाता है। वे छह महीने तक या नए संचालक मंडल के चुनाव होने तक कार्यभार संभालेंगे और जल्द से जल्द चुनाव प्रक्रिया पूरी करवाने के लिए जिम्मेदार होंगे।
