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कांग्रेस नगरपालिका अध्यक्ष 7वें दिन फिर सस्पेंड

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कांग्रेस नगरपालिका अध्यक्ष 7वें दिन फिर सस्पेंड

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हाईकोर्ट से स्टे लेकर कुर्सी पर बैठे थे, पद के दुरुपयोग पर फिर गिरी गाज
डूंगरपुर, 20 जनवरी:
डूंगरपुर जिले की सागवाड़ा नगरपालिका में अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा राजनीतिक घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। हाईकोर्ट से निलंबन पर स्टे मिलने के बाद महज 7 दिन पहले दोबारा कुर्सी संभालने वाले कांग्रेस नेता और नगर पालिका अध्यक्ष नरेंद्र खोड़निया को फिर से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद सागवाड़ा नगरपालिका की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है।
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक एवं विशिष्ट सचिव जुईकर प्रतीक चंद्रशेखर ने मंगलवार को निलंबन के आदेश जारी किए। आदेशों में कहा गया है कि अध्यक्ष रहते हुए नरेंद्र खोड़निया ने पद का दुरुपयोग किया, नियमों के विरुद्ध पट्टे जारी किए और नाले व ग्रीन बेल्ट की जमीन तक के पट्टे बांटे, जो गंभीर अनियमितता की श्रेणी में आता है।
खुद के नाम और परिजनों को दिए पट्टे
शिकायत के बाद स्थानीय निकाय विभाग उदयपुर के उपनिदेशक (क्षेत्रीय) से कराई गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच रिपोर्ट के अनुसार, नरेंद्र खोड़निया ने अपनी ही अध्यक्षता में गठित एम्पावर्ड कमेटी से अपने नाम पर पट्टा संख्या 69(ए) जारी करवा दिया। इसके अलावा अतिरिक्त जमीन का शुल्क लिए बिना ही पट्टे स्वीकृत किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि भाई संतोष कुमार खोड़निया और भतीजे सुमित खोड़निया के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर पट्टे जारी किए गए। मूल सत्यापित प्लान में दर्शाई गई 30 फीट सड़क की जमीन को भी हड़पते हुए, उसे 90-बी के तहत संपरिवर्तित कर अनैतिक लाभ पहुंचाया गया।
नाले और ग्रीन बेल्ट की जमीन पर भी पट्टे
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ मामलों में नाले और ग्रीन बेल्ट की जमीन को कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए आवासीय पट्टों में तब्दील कर दिया गया। इससे न सिर्फ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा, बल्कि शहरी नियोजन नियमों की भी खुली अनदेखी हुई।
नोटिस का जवाब नहीं दिया
दोष सिद्ध होने पर अध्यक्ष नरेंद्र खोड़निया को स्पष्टीकरण के लिए नोटिस जारी किया गया, लेकिन उन्होंने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया। साथ ही, अध्यक्ष पद पर रहते हुए न्यायिक जांच को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
पहले भी हो चुके हैं निलंबित
गौरतलब है कि इससे पहले भी 10 अप्रैल 2025 को नरेंद्र खोड़निया को सागवाड़ा नगरपालिका भवन गिराने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में निलंबित किया गया था। बाद में 12 जनवरी को राजस्थान हाईकोर्ट से उन्हें निलंबन पर स्टे मिला, जिसके बाद 14 जनवरी को वे फिर से अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे थे।
कुर्सी को लेकर बना था असमंजस
15 जनवरी को स्थिति तब और उलझ गई, जब कांग्रेस के नरेंद्र खोड़निया और भाजपा के आशीष गांधी, दोनों ने खुद को सागवाड़ा नगरपालिका का अध्यक्ष बताते हुए कुर्सी संभाल ली। इससे प्रशासनिक असमंजस की स्थिति बन गई थी। नगर पालिका के अधिशाषी अभियंता को भी सरकार से मार्गदर्शन मांगना पड़ा। अब एक बार फिर निलंबन के आदेश के बाद सागवाड़ा नगरपालिका में राजनीतिक सरगर्मी और प्रशासनिक अनिश्चितता का माहौल बन गया है।

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