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न जाने क्यों घर बैठा दिया वसुंधरा राजे को”: पूर्व सीएम गहलोत ने उठाए सवाल

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न जाने क्यों घर बैठा दिया वसुंधरा राजे को”: पूर्व सीएम गहलोत ने उठाए सवाल

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भजनलाल सरकार पर तीखे आरोप
उदयपुर, 12 नवम्बर
: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली पर तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि वह समझ नहीं पा रहे कि भाजपा ने दो बार राजस्थान चला चुकी और सक्षम नेता वसुंधरा राजे को क्यों घर बैठा दिया। सर्किट हाउस में उदयपुर प्रवास के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए गहलोत ने मुख्यमंत्री और प्रशासनिक निर्णयों पर कई गंभीर सवाल उठाए।
गहलोत ने कहा कि वसुंधरा राजे जब मुख्यमंत्री थीं तो अलग ढंग से सरकार चला रही थीं और बाद में उनके साथ संबंध सामान्य भी रहे। “पता नहीं उन्हें क्यों घर बैठा दिया गया, वे सक्षम हैं,” उन्होंने कहा। उन्होंने मुख्य सचिव सुधांशु पंत को अचानक दिल्ली भेजे जाने का जिक्र करते हुए चिंता जताई कि कहीं यह स्थिति भजनलाल शर्मा के साथ ही न हो।
प्रदेश में संचालित शहरी सेवा शिविरों की मॉनिटरिंग पर भी गहलोत ने आशंका जताई—कहते हैं कि यह स्पष्ट नहीं है कि शिविर कार्य कर रहे हैं या नहीं। “हम विपक्ष में हैं, अपनी भूमिका निभाएंगे — कमियां बताएंगे और आलोचना करेंगे; सरकार को इसे व्यक्तिगत नहीं लेना चाहिए,” उन्होंने कहा और आरोप लगाया कि भजनलाल सरकार विपक्ष को अनदेखा कर रही है। गहलोत ने यह भी कहा कि पहले के वशिष्ठ प्रशासनिक रवैये की तुलना में आज का माहौल ठीक नहीं है और बिना विपक्ष के लोकतंत्र अधूरा है।
‘वंदे मातरम’ के सार्वजनिक उपयोग का राजनीतिकरण ठीक नहीं
राष्ट्रीय स्तर के कुछ मामलों पर भी गहलोत ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि देशभर में ‘वंदे मातरम’ के सार्वजनिक उपयोग का राजनीतिकरण ठीक नहीं — यह गीत पहले रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस अधिवेशन में प्रस्तुत किया था और इसे किसी एक दल से जोड़ना सही नहीं। दिल्ली विस्फोट की जांच की गम्भीरता पर उन्होंने जोर देते हुए कहा कि दुर्घटनाओं और हादसों की बढ़ती संख्या पर सरकार को समेकित निगरानी करनी चाहिए।
स्थानीय मुद्दों पर भी गहलोत ने निन्दा की। उदयपुर के बलीचा में उद्यान/अवैध कॉलोनियों पर की गई कार्रवाई पर उन्होंने पूछा कि जब लोगों ने प्लॉट काटे और अवैध कॉलोनी बनाई जा रही थी तब प्रशासन ने क्यों ध्यान नहीं दिया। “गरीबों के लाखों रुपए का नुकसान हुआ है; कार्रवाई कानून के अनुसार और तर्कसंगत होनी चाहिए,” गहलोत ने कहा और ब्यूरोक्रेसी की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया।

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