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ई-केवाईसी में सर्वर ठप, नरेगा श्रमिकों की बढ़ी चिंता

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ई-केवाईसी में सर्वर ठप, नरेगा श्रमिकों की बढ़ी चिंता

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सरकार ने पारदर्शिता के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य की, लेकिन डूंगरपुर में ठप सर्वर से कामकाज थमा

डूंगरपुर, 28 अक्टूबर (विजन 360 न्यूज डेस्क):
आदिवासी अंचल डूंगरपुर जिले में इन दिनों महात्मा गांधी नरेगा योजना के श्रमिकों की सबसे बड़ी चिंता है ई-केवाईसी करवाना।
सरकार ने फर्जीवाड़े रोकने और भुगतान प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए सभी श्रमिकों के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य की है, जिसकी अंतिम तारीख 31 अक्टूबर तय की गई है। किन्तु जब श्रमिक अपने जॉब कार्ड अपडेट करवाने पहुंचे, तो सरकार की डिजिटल व्यवस्था ही ठप पड़ गई। सर्वर डाउन होने से हजारों श्रमिक प्रभावित हुए हैं। ऐसे में उन्हें घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ घर लौटना पड़ा।
सर्वर ठप, पंचायतों में अफरातफरी
बुधवार को डूंगरपुर जिले की 353 ग्राम पंचायतों में नरेगा श्रमिक सुबह से लाइन में लगे रहे। लेकिन दोपहर 12 बजे के बाद से ही महात्मा गांधी नरेगा का एम.आई. एस पोर्टल ठप पड़ गया। डूंगरपुर, बिछीवाड़ा, झोथरी, गलियाकोट, साबला और सीमलवाड़ा जैसे ब्लॉकों में ई-केवाईसी का काम पूरी तरह रुक गया। कई पंचायतों में 2-2 घंटे की लाइन में लगे लोगों को यह कहकर वापस भेज दिया गया कि “सर्वर नहीं चल रहा है, कल आना पड़ेगा।” श्रमिकों ने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि “जब सरकार ने तारीख तय कर रखी है तो उसकी तकनीकी तैयारी क्यों नहीं की?”
3.66 लाख परिवारों की चिंता बढ़ी
डूंगरपुर जिले में करीब 3 लाख 66 हजार परिवार नरेगा योजना में पंजीकृत हैं। यही उनकी आजीविका का आधार है। अधिकांश लोग हर साल रोज़गार की तलाश में गुजरात पलायन करते हैं, लेकिन नरेगा योजना के बाद उन्होंने गांव में रहकर काम करने का रास्ता चुना। अब सरकार ने ई-केवाईसी अनिवार्य की, तो दीपावली के बाद कई परिवार गुजरात से लौट आए, ताकि भुगतान बंद न हो जाए। लेकिन ठप सर्वर ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया। एक दिन की मजदूरी गंवाने के साथ बस किराया और फिर खाली हाथ घर लौटना, यह उनकी हकीकत बन गई है।
भूखे-प्यासे सर्वर के चलने के इंतजार में नरेगा मजदूर
झोथरी पंचायत समिति की लक्ष्मी की नरेगा श्रमिक है, कहती हैं, “हम दीपावली बाद गुजरात से लौटे, सुबह 8 बजे से बैठे हैं, लेकिन मशीन चल नहीं रही। अधिकारी बस यही बोलते रहे कि सर्वर डाउन है। एक दिन की मजदूरी भी गई, ऊपर से पैसे नहीं आए तो बच्चों को क्या खिलाएं?” इसी तरह, सुरेश फलेजा ने बताया कि उसकी बेटी की डिलीवरी थी, इसलिए दो दिन पहले लौटे हैं। अब अंतिम तारीख सिर पर है और ऑनलाइन सिस्टम ठप पड़ा है।
लोड बढ़ने से तकनीकी समस्या – सीईओ
जिला परिषद सीईओ हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि सर्वर पर लोड बढ़ने से यह दिक्कत आ रही है। 31 अक्टूबर आखिरी तारीख है, इसलिए एक साथ अधिक संख्या में केवाईसी होने से तकनीकी दिक्कत आई है। समस्या अस्थायी है और इसे तुरंत ठीक करवाया जा रहा है।

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