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जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा और समानता जरूरी: राज्यपाल बागड़े

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जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा और समानता जरूरी: राज्यपाल बागड़े

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उदयपुर, 7 जनवरी: राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने कहा कि जनजाति बहुल क्षेत्रों में शिक्षा का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। गरीब बच्चों को समान अवसर मिलने के लिए उनकी प्राथमिक शिक्षा मजबूत होना आवश्यक है।
वे बुधवार को भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अभिभावकों, अभ्यर्थियों और प्राध्यापकों को दीक्षांत समारोह में संबोधित करते हुए कहा कि यदि एक पीढ़ी बदल जाएगी, तो समाज में अमीर-गरीब की खाई समाप्त हो जाएगी। राज्यपाल ने स्कूल संचालकों से अपील की कि वे गरीब बच्चों को पढ़ाने का विशेष ध्यान रखें, ताकि शिक्षा के माध्यम से गरीबी दूर हो और समाज में समानता स्थापित हो सके।
भारत का गौरव और इतिहास
राज्यपाल बागड़े ने कहा कि विश्वविद्यालय भारत के गौरव को बढ़ाएगा और तक्षशिला व नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षा संस्थानों का इतिहास लौटाएगा। उन्होंने सभी में ऐसी भावना बनाए रखने का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने महाराणा भूपाल सिंह का स्मरण किया, जिनके शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में योगदान को उन्होंने सराहा। उन्होंने कृषि क्षेत्र में विकास करने वाले भूमिपाल का भी जिक्र किया और मेवाड़ के महाराणाओं द्वारा की गई सेवा की ओर ध्यान दिलाया।
बप्पा रावल और रावल पिंडी का इतिहास
राज्यपाल ने बताया कि बप्पा रावल ने आज के अफगानिस्तान तक दुश्मनों को भगाया और लौटते समय रुके स्थान का नाम रावल पिंडी पड़ा। उन्होंने इतिहास से जुड़ी इन घटनाओं के महत्व को छात्रों और अभिभावकों के सामने रखा।
कार्यक्रम में देरी और बच्चों की परेशानी
कोहरे के कारण राज्यपाल का दिल्ली से चार्टर विमान देरी से उड़ान भर पाया। निर्धारित समय दोपहर 12.15 बजे समारोह में शामिल होने के बजाय वे 2.50 बजे पहुंचे। इस कारण विद्यालयीन बच्चे और अभिभावक पांडाल में लंबे समय तक बैठे परेशान रहे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से बच्चों और अभिभावकों को सुबह 11 बजे ही बुला लिया था, जिससे उन्हें भूख और थकान का सामना करना पड़ा।
राज्यपाल द्वारा विश्वविद्यालय के 99 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। साथ ही 47 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक सहित कुल 2025 विद्यार्थियों को विभिन्न संकायों की स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्रियां प्रदान की गईं। 62 पीएचडी उपाधि, 35 गोल्ड मेडल पर बेटियों ने कब्जा किया।

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