मुंबई में फर्जी वैज्ञानिक गिरफ्तार
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BARC में घुसने की कोशिश; परमाणु ब्लूप्रिंट, तीन पासपोर्ट और 14 नक्शे बरामद
मुंबई, 30 अक्टूबर: मुंबई में एक बड़ी सुरक्षा चूक के तहत, वर्सोवा से 60 वर्षीय अख्तर कुतुबुद्दीन हुसैनी नाम के एक फर्जी वैज्ञानिक को गिरफ्तार किया गया है। वह खुद को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) का अधिकारी बताता था और परिसर में घुसने में भी कामयाब रहा था। क्राइम ब्रांच ने NIA और IB की सूचना पर यह गिरफ्तारी की।
परमाणु डेटा और जासूसी का शक
अख्तर हुसैनी के पास से 14 संदिग्ध मैप, परमाणु ब्लूप्रिंट से जुड़े संवेदनशील डेटा, और तीन पासपोर्ट बरामद हुए हैं। जांच एजेंसियों को शक है कि हुसैनी ने इन पासपोर्ट्स का इस्तेमाल जासूसी या गोपनीय जानकारी के लेन-देन से जुड़ी कई विदेश यात्राओं के लिए किया था। अख्तर को अधिकारी पिछले दो साल से ट्रैक कर रहे थे।
फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल
घर की तलाशी में पुलिस को फर्जी पासपोर्ट, आधार, पैन कार्ड और BARC के नकली ID कार्ड मिले हैं। एक पहचान पत्र पर उसका नाम ‘अली रजा हुसैन’ और दूसरे पर ‘अलेक्जेंडर पामर’ लिखा था। पुलिस को संदेह है कि हुसैनी का संपर्क किसी विदेशी नेटवर्क से था और वह संवेदनशील परमाणु डेटा बेचने की कोशिश कर रहा था। पुलिस जांच में पता चला है कि हुसैनी ने पिछले कुछ महीनों में कई अंतरराष्ट्रीय कॉल किए थे।
पुरानी आपराधिक पृष्ठभूमि
हुसैनी की पृष्ठभूमि संदिग्ध रही है। साल 2004 में उसे दुबई से इस आधार पर डिपोर्ट किया गया था कि उसने खुद को ‘गोपनीय दस्तावेजों वाला वैज्ञानिक’ बताकर गुमराह किया। उसके खिलाफ मेरठ में यूपी सरकार के खिलाफ दंगा भड़काने का मामला भी दर्ज है।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि उसने अपने भाई आदिल और झारखंड के मुन्नजिल खान की मदद से फर्जी पासपोर्ट बनवाए थे, जिनमें 30 साल पहले बेची जा चुकी पुश्तैनी संपत्ति का पता दर्ज था। दिल्ली पुलिस द्वारा आदिल हुसैनी की गिरफ्तारी के बाद ही अख्तर का पर्दाफाश हुआ। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।
