चाबहार पोर्ट पर भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों से 6 महीने की छूट
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अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक निर्बाध पहुँच सुनिश्चित
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर: भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत में, अमेरिकी सरकार ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर प्रतिबंधों से भारत को छह महीने की रियायत दे दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि की। यह छूट ऐसे समय में आई है जब हाल ही में इसकी पिछली मियाद (27 अक्टूबर) खत्म हुई थी।
रणनीतिक महत्व और निवेश
चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान के रास्ते को बाइपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप से सीधे व्यापार करने में सक्षम बनाता है। इस साल (2024 में), भारत ने इस पोर्ट को 10 साल के लिए लीज पर लिया है, जिसके तहत भारत $120 मिलियन का निवेश करेगा और $250 मिलियन की क्रेडिट लाइन (सस्ता कर्ज) देगा।
छूट से भारत को चार बड़े फायदे
सेंट्रल एशिया तक पहुँच: भारत अब पाकिस्तान के रास्ते के बजाय चाबहार पोर्ट के माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक अपना माल सीधे भेज सकेगा, जिससे समय और पैसा दोनों बचेगा।
व्यापार और निर्यात में वृद्धि: यह छूट भारत को दवाओं, फूड और औद्योगिक उत्पादों का निर्यात आसानी से बढ़ाने और लॉजिस्टिक खर्च को कम करने में मदद करेगी।
निवेश सुरक्षा: भारत द्वारा बंदरगाह के विकास में किए गए बड़े निवेश को अब बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाया जा सकेगा।
चीन-पाकिस्तान का काउंटर: चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान के चीन-समर्थित ग्वादर पोर्ट के नजदीक स्थित है, जो इसे भारत के लिए रणनीतिक रूप से एक मजबूत काउंटर बनाता है।
चाबहार पोर्ट से भारत अफगानिस्तान को गेहूं जैसे आवश्यक सामान भेजता है और मध्य एशिया से गैस व तेल ला सकता है। भारत और ईरान के बीच 2018 में हुए समझौते के तहत अमेरिका ने पहले भी इस प्रोजेक्ट के लिए प्रतिबंधों में छूट दी थी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस की अन्य मुख्य बातें:
अमेरिका से जनवरी से अब तक 2,790 और ब्रिटेन से करीब 100 अवैध भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट किया गया है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है।
भारत ने कश्मीर पर OIC (ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन) के बयानों को पूरी तरह खारिज किया और आंतरिक मामलों पर टिप्पणी न करने को कहा।
