इंदिरा गांधी ने जब बदली दक्षिण राजस्थान की तकदीर
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1 नवंबर 1983 को बटन दबाते ही माही की लहरों से छलका विकास का सपना
सुभाष शर्मा
उदयपुर, 31 अक्टूबर: देश के इतिहास में 1 नवंबर 1983 वह तारीख बन गई, जिसने दक्षिण राजस्थान की धरती की तकदीर ही बदल दी। इसी दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने एक बटन दबाकर माही परियोजना की नहरों में जल प्रवाह का शुभारंभ किया था। वह क्षण सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि वागड़ अंचल के लिए विकास की नई सुबह थी।
माही परियोजना से पहले दक्षिण राजस्थान सूखे और पिछड़ेपन का प्रतीक था, लेकिन परियोजना के शुरू होते ही खेतों में हरियाली, नदियों में प्रवाह और जनजीवन में समृद्धि लौट आई।
माही का सपना और उसके साकार होने की गाथा
माही परियोजना की परिकल्पना सबसे पहले बांसवाड़ा के पहले प्रधानमंत्री भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी ने चंद्रसागर बांध की तरह की थी। इस सपने को आकार देने में आदिवासी समाज के मसीहा भीखाभाई का विशेष योगदान रहा। बाद में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने इस परियोजना को बुलंदियों तक पहुंचाया।
नदी के नीचे साइफन के जरिए पानी पहुंचाया
माही परियोजना से जुड़े रहे सेवानिवृत्त सहायक अभियंता भंवर पांचाल बताते हैं कि माही परियोजना राजस्थान की ही नहीं, बल्कि देश या विश्व की ऐसी पहली परियोजना थी, जिसे बांध की मूल नदी के नीचे साइफन के जरिए पानी पहुंचाचा गया। इससे पहले सागवाड़ा तक माही का पानी पहुंचाने की चुनौती थी, जिसे एक चुनौती के लिए रूप में लिया गया। तत्कालीन इंजीनियरों ने अद्भुत तकनीक से इसे संभव कर दिखाया। माही नदी पर बने साइफन उस दौर की अनूठी इंजीनियरिंग मिसाल हैं।
‘माही दर्शन’: एक फिल्म जिसने दिखाई विकास की तस्वीर
माही परियोजना की महत्ता और उसकी यात्रा को दर्शाने के लिए वर्ष 1986 में बनी फिल्म ‘माही दर्शन’ आज भी ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में जानी जाती है। तत्कालीन मुख्य अभियंता डी.एम. सिंघवी के निर्देशन में बनी इस फिल्म की स्क्रिप्ट और आवाज ‘तण वाटे’ के निर्देशक प्रदीप द्विवेदी ने दी। फिल्मांकन सैटेलाइट स्टूडियो के साहले सईद ने किया, जबकि संपादन अभिनेता भंवर पंचाल ने संभाला। संवाद तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी पन्नालाल मेघवाल ने लिखे। ‘माही दर्शन’ के निर्माण में कई हस्तियों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष योगदान रहा। इनमें जनसंपर्क अधिकारी गोपेन्द्रनाथ भट्ट, प्रमुख अभियंता शमशेर सिंह, जे.पी. भाटिया, सी.बी. माथुर, एम.एल. जैन, टी.एन. सक्सेना, आई.सी. अरोड़ा, बी.एस. माथुर, शैलेंद्र उपाध्याय और जगन्नाथ तैली आदि शामिल थे।
