करोड़ों टन चांदी के खजाने पर बैठी है जावर माता, भक्तों की हर मन्नत पूरी करती है माताजी
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नेजा लूटने की परंपरा है खूब प्रसिद्ध, दोनों नवरात्रि में होते हैं अनुष्ठान
उदयपुर, 25 सितम्बर: उदयपुर जिले के जावर क्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ जावर माता का मंदिर आस्था और आर्जव का केंद्र माना जाता है। विशेष बात यह है कि माताजी करोड़ों टन चांदी की खदान पर विराजमान हैं, इसलिए इन्हें जिले की सबसे ‘धनाढ्य देवी’ भी कहा जाता है। यहां चढ़ावे में जेवर चढ़ाने की परंपरा रही है और इसी से ‘जावर माता’ नाम पड़ा।
हजार वर्ष पुराना है इतिहास
उदयपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित जावर माता शक्तिपीठ का इतिहास एक हजार वर्ष से अधिक पुराना है। शिलालेखों के अनुसार, सच्ची श्रद्धा से की गई हर मनोकामना यहां पूरी होती है। टीड़ी नदी के तट पर बने इस मंदिर में सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है, जबकि रविवार को भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है।
इस तरह पड़ा जावर माता नाम
कहा जाता है कि जावर की खदानों से निकली चांदी से जेवर बनाए जाते थे और वे जेवर माताजी को अर्पित किए जाते थे। इसी परंपरा से ‘जेवर’ से ‘जावर माता’ नाम प्रसिद्ध हुआ। मेवाड़ राजघराने का भी इस मंदिर से गहरा संबंध रहा है। लगभग 600 वर्ष पूर्व युद्ध के समय राजघराना माताजी से आशीर्वाद मांगता था और उन्हें शक्ति स्वरूप सहयोग प्राप्त होता था। बाद में मंदिर की पूजा-अर्चना ब्राह्मण समाज को सौंप दी गई, जो आज भी निरंतर जारी है।
नवरात्रि में नौ दिन होते हैं अनुष्ठान
यहां शारदीय और चैत्र नवरात्रि में नौ दिनों तक नवचंडी यज्ञ और हवन होते हैं। जावर माइंस की सभी खदानों की ओर से विशेष पूजाएं कराई जाती हैं। वर्तमान में गौतम महाराज, पंडित जगदीश रावल, यशवंत पुजारी सहित कई ब्राह्मण परिवार इस परंपरा को निभा रहे हैं। मंदिर की ‘नेजा लूटने की परंपरा’ पूरे देश में अपनी तरह की अनोखी परंपरा मानी जाती है।
