अंतिम यात्रा में 50 से अधिक गायों ने निभाया अद्भुत साथ
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भाटौली गांव में दिखा भावुक और धार्मिक दृश्य
डूंगरपुर, 9 दिसम्बर: डूंगरपुर जिले में साबला क्षेत्र के भाटौली गांव में एक बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार में अद्भुत दृश्य देखने को मिला। जब मौत के बाद 50 से अधिक गौ-वंश उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुआ। गौवंश गांव से लगभग 5 किलोमीटर दूर मोक्षधाम तक श्मशान तक पहुंचा।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव के स्वर्गीय नाथू सिंह की 55 वर्षीया पत्नी सज्जन कंवर की मौत हो गई थी। दिवंगत सज्जन कंवर ने अपना जीवन गौ-सेवा, दया और धर्मपरायणता में बिताया और वह प्रतिदिन गायों, कुत्तों और पक्षियों को भोजन देतीं और जीवन भर धर्म, दान और सेवा को प्राथमिकता देतीं। यही कारण था कि उनके अंतिम संस्कार में गौ-वंश ने स्वाभाविक रूप से साथ देना शुरू कर दिया।
मोक्षधाम तक अनुशासित साथ
शव यात्रा के दौरान गौ-वंश ने अंतिम संस्कार तक अनुशासनपूर्वक साथ निभाया। अंतिम संस्कार की समाप्ति के बाद गायें वापस गांव लौट गईं। इस दृश्य ने वहां मौजूद ग्रामीणों को भावुक कर दिया। कई लोगों ने इसे धर्म और आस्था का प्रतीक बताया और कहा, “जो जीव-मात्र की सेवा करता है, उसकी सेवा स्वयं ईश्वर स्वीकारते हैं।”
धर्म और आस्था का संदेश
घटना ने साबला क्षेत्र में लोगों के बीच चर्चा और प्रेरणा पैदा कर दी। बुजुर्गों ने बताया कि हिंदू धर्म में गौ-माता को ‘माता’ का दर्जा ऐसे ही नहीं दिया गया है। जीवों के प्रति समर्पण और सद्भावना कभी व्यर्थ नहीं जाती। इस अद्भुत घटना ने यह संदेश दिया कि धर्म और सेवा के मार्ग पर चलने वाले को ईश्वर हमेशा अकेला नहीं छोड़ते।
