सांसद डॉ. रावत ने मांगी दक्षिण राजस्थान में सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी
Share
उदयपुर, 3 दिसंबर (विजन 360 न्यूज डेस्क): सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने संसद के शीतकालीन सत्र में शून्यकाल के दौरान दक्षिण राजस्थान में सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी की स्थापना की मांग प्रमुखता से उठाई। उन्होंने कहा कि इससे भील युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नए अवसर प्राप्त होंगे।
डॉ. रावत ने बताया कि भील जनजाति राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में सबसे अधिक निवास करती है और इसकी जनसंख्या लगभग तीन करोड़ से अधिक है। मानगढ धाम के बलिदान और हल्दीघाटी के युद्ध में भील जनजाति ने हमेशा आदिदेव महादेव के आशीर्वाद से संघर्ष किया।
सांसद ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने जनजाति समाज के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई हैं, जैसे प्रधानमंत्री जनमन योजना और धरती आबा अभियान। इसके अलावा, उत्तर-पूर्व और तेलंगाना में सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी की स्थापना हो चुकी है। उन्होंने सुझाव दिया कि भील बाहुल्य क्षेत्र में भी एक ऐसी यूनिवर्सिटी स्थापित की जाए, जिससे तीन-ढाई करोड़ लोगों के लिए शिक्षा और विकास के अवसर बढ़ सकें।
मेवाड़ या वागड़ के किसी भी जिले में खोली जानी चाहिए सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी
उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने मोबाइल पर बातचीत के जरिए बताया राजस्थान के मेवाड़—वागड़ के अलावा सिरोही, झालावाड़ और उसके करीबी जिलों में आदिवासी लोग बसते हैं। इनमें भी सबसे ज्यादा उदयपुर संभाग में डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, सलूम्बर आदिवासी बहुल जिले हैं, इनमें से किसी भी जिले में यूनिवर्सिटी खोली जा सकती है। उन्होंने कहा, कनेक्टिविटी के हिसाब से देखा जाए तो उदयपुर सबसे उपयुक्त जगह है, जहां सेंट्रल ट्राइबल यूनिवर्सिटी खोली जा सकती है।
आदिवासी हिन्दू है और अलग धर्म कोड की मांग अनुचित
सांसद डॉ. रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि भील जनजाति हिंदू है और इसके लिए अलग धर्म कोड की मांग पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कांग्रेस सांसद गोपाल कांगड़ा की इस मांग पर गंभीर आपत्ति जताई।
