सांसद रोत बोले, “कमल और कांग्रेस एक”
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पीएम मोदी के दौरे से पहले बांसवाड़ा में सांसद रोत का धरना
न्यूक्लियर पावर प्लांट विस्थापितों की 30 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन
उदयपुर, 23 सितम्बर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को बांसवाड़ा-मध्यप्रदेश बॉर्डर पर बनने वाली करीब 45 हजार करोड़ की परमाणु ऊर्जा परियोजना का शिलान्यास करेंगे। लेकिन इससे दो दिन पहले ही भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) सांसद राजकुमार रोत विस्थापितों की समस्याओं को लेकर आंदोलन पर उतर आए।
मंगलवार दोपहर सांसद रोत दोपहर करीब 1 बजे जिला कलेक्ट्रेट पर विस्थापितों के साथ धरने पर बैठे। बीएपी कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम 30 सूत्री ज्ञापन सौंपा। करीब दो घंटे तक जमकर नारेबाजी हुई। कलेक्टर ने कुछ मांगों पर सहमति जताई, लेकिन रोत ने साफ कहा कि “मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।”
धरना स्थल पर रोत ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियां परमाणु परियोजना के मुद्दे पर एक जैसी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण से लेकर अन्य कार्य दोनों सरकारों में हुए हैं।
मुआवजा और दूषित पानी पर सवाल
रोत ने कहा कि एनपीसीआईएल ने 50 लाख प्रति बीघा का माहौल बनाया, जबकि वास्तविक मुआवजा 7.68 लाख प्रति बीघा दिया गया। उन्होंने मांग की कि कंपनी अपने पूर्व आश्वासन के अनुसार मुआवजा दे।
साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि रिएक्टर का दूषित पानी माही नदी में छोड़ा गया तो जैव विविधता और मछुआरों की आजीविका पर संकट आएगा। उन्होंने कहा, माही बांध से विस्थापित 40 मछुआरा परिवारों को अब दोबारा उजाड़ा जा रहा है। उन्हें पहले का मुआवजा भी नहीं मिला है। वे 2015 से हाईकोर्ट की शरण लिए हुए हैं। रोत ने इन परिवारों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग दोहराई।
नियमों के उल्लंघन और CSR फंड के दुरुपयोग का आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि एनपीसीआईएल सीएसआर मद का उपयोग प्रभावितों के बजाय अन्य कार्यों में कर रही है। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों में कई पहले माही बांध से उजड़े थे, जिन्हें दोबारा विस्थापित करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है।
मुआवजा और पुनर्वास की प्रमुख मांगें
प्रत्येक बेघर परिवार को 50 लाख रुपए दिए जाएं।
किसानों को जमीन के बदले जमीन मिले।
योजना का विरोध करने वालों पर दर्ज मुकदमे वापस हों।
प्रभावित गांवों को एक ही स्थान पर कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराई जाए।
हर परिवार के 18 वर्ष से ऊपर के सदस्य को नौकरी मिले।
विवाहित पुत्रों के लिए 1600 वर्गफीट मकान नगर परिषद परिसर में बनाकर दिया जाए।
भूमिहीन किसानों को नौकरी, जमीन व अन्य सुविधाएं मिलें।
परमाणु बिजलीघर के मुनाफे का 20 प्रतिशत हिस्सा 100 साल तक किसानों को दिया जाए।
प्रभावित परिवार को प्रतिमाह 25 हजार रुपए पेंशन और वार्षिक महंगाई भत्ता मिले।
12वीं पास युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण देकर नौकरी दी जाए।
