नवदीक्षित क्षुल्लिका धन्यमति माताजी जल–नारियल जल से साधना रत
Share
उदयपुर, 25 नवम्बर: हिरणमगरी सेक्टर-4 स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आचार्य पुण्य सागर के सान्निध्य में नवदीक्षित क्षुल्लिका धन्यमति माताजी दीक्षा दिवस से ही केवल जल और नारियल जल का ही आहार ग्रहण कर कठोर साधना कर रही हैं।
गौरतलब है कि विगत 19 नवम्बर को दीक्षित हुई क्षुल्लिका को गुरुदेव द्वारा स्थान परिमाण भी कराया गया है। साधना में आर्यिका माताजी, बाल ब्रह्मचारी वीणा दीदी और ब्रह्मचारी विकास भैया सहयोग दे रहे हैं।
इसी कड़ी में मंगलवार को किशनगढ़ से भामाशाह अशोक पाटनी, सुशीला पाटनी और विमल पाटनी ने आकर क्षुल्लिका के दर्शन किए। बता दें, क्षुल्लिका धन्यमति, सुशीला पाटनी की बड़ी बहन हैं।
इस अवसर पर आचार्यश्री ने कहा कि 85 वर्षीय भंवरी देवी काला ने क्षुल्लिका धन्यमति बनकर जीवन धन्य किया है। समाधि मरण जैन दर्शन में सांसारिक बंधनों से मुक्ति की सर्वोच्च साधना है। प्रवक्ता मुकेश पांड्या ने बताया कि गुरुदेव अब तक लगभग 70 समलेखना समाधियां करवा चुके हैं।
