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राणा प्रतापनगर स्टेशन पर टिकट के लिए संघर्ष करते यात्री

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राणा प्रतापनगर स्टेशन पर टिकट के लिए संघर्ष करते यात्री

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टिकट खिड़की अब सिर्फ एक शिफ्ट में, कभी-कभी यात्रियों को चढ़ना पड़ जाता है बेटिकट

राजेश वर्मा
उदयपुर, 15 नवम्बर:
अमृत स्टेशन योजना के तहत 20.86 करोड़ रुपए की लागत से राणा प्रतापनगर रेलवे स्टेशन को आदर्श स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है, लेकिन इसके उलट यहां टिकट व्यवस्था बदहाल होती जा रही है। यहां दो पारी में चलने वाला रिजर्वेशन काउंटर बंद कर दिया गया है और अब पूरे दिन केवल एक ही टिकट खिड़की संचालित हो रही है। इससे यात्रियों को टिकट के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई बार ट्रेन आने के दौरान खिड़की बंद करनी पड़ती है, जिससे यात्रियों के सामने ट्रेन छोड़ने या बिना टिकट सफर करने का संकट खड़ा हो जाता है। हालांकि, वहां एक ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) लगाई गई है, लेकिन यात्री भार ज्यादा होने से वह भी नाकाफी साबित हो रही है।
गौरतलब है कि उदयपुर शहर का यह पुराना स्टेशन ब्रिटिश शासन के दौरान देबारी लाइन विस्तार के साथ बना था। उदयपुर सिटी स्टेशन से संचालित होने वाली दो दर्जन ट्रेनों के करीब 75% यात्री यहीं से चढ़ते-उतरते हैं। इसके बावजूद दोपहर 2 बजे से एक टिकट खिड़की बंद कर दी गई। अब सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक एक खिड़की पर रिजर्वेशन होता है, वहीं 2 बजे के बाद दूसरी खिड़की पर सामान्य और रिजर्वेशन दोनों टिकटों का भार आ जाता है। खासकर शाम 4 से 6.15 बजे के बीच भीड़ चरम पर रहती है।
टिकट वाला कार्मिक ही अनाउंसर भी, फ्लैग देने वाला भी
-शाम के वक्त टिकट खिड़की पर जो कार्मिक तैनात रहता है, ट्रेन आगमन के दौरान अनाउंसमेंट की जिम्मेदारी और फ्लैग दिखाने की जिम्मेदारी भी उसी की रखी गई है। ऐसे में खिड़की बंद करनी पड़ती है और इससे यात्री और भी परेशान होते हैं।
इसलिए कम कर दी एक खिड़की
-रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ने और रोज़ाना 100 से कम रिजर्वेशन फॉर्म आने को आधार बनाकर एक खिड़की कम कर दी गई है। कई यात्री फॉर्म में राणा प्रतापनगर की बजाय उदयपुर सिटी लिख देते हैं, जिससे राजस्व भी सिटी स्टेशन के खाते में चला जाता है।
खुद सुपरवाइजर को संभालनी पड़ती है खिड़की
-यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई बार खुद कमर्शियल सुपरवाइजर अब्दुल शमीम खान को खिड़की संभालनी पड़ती है।
पुनर्विकास में बन रही दूसरी एंट्री, जरूरत तो उधर भी रहेगी खिड़की की
-21 करोड़ रुपए की पुनर्विकास योजना के तहत स्टेशन का स्वरूप बदल रहा है और नया सेकंड एंट्री गेट भी तैयार हो चुका है, जिसे जल्द यात्रियों को समर्पित किया जाएगा। यात्रियों और शहरवासियों का कहना है कि सेकंड एंट्री गेट शुरू होते ही लगभग पूरे हिरणमगरी क्षेत्र के यात्रियों के लिए यही एंट्री मुफीद रहने वाली है। ऐसे में इस ओर भी टिकट खिड़की की आवश्यकता पड़ेगी। इस पर अभी से विचार करने की आवश्यकता है।

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