पॉक्सो कोर्ट का सख्त संदेश: बच्ची को देख गलत सोच कैसे आ सकती है, रेप दोषी को 20 साल की सजा
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चित्तौड़गढ़, 3 फरवरी: चित्तौड़गढ़ की पॉक्सो कोर्ट संख्या–2 ने साढ़े तीन–चार साल की मासूम से दुष्कर्म के आठ साल पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 1 लाख 40 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। यह फैसला मंगलवार को पॉक्सो कोर्ट–2 की पीठासीन अधिकारी शहनाज परवीन ने सुनाया। अदालत ने कहा कि इतनी छोटी बच्ची को देखकर किसी व्यक्ति में गलत भावना आना बेहद चिंताजनक और विकृत मानसिकता को दर्शाता है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस अमानवीय अपराध में बच्ची का बचपन, सम्मान और गरिमा छीन ली गई। वारदात के बाद बच्ची की हालत इतनी गंभीर थी कि उसकी बच्चेदानी शरीर से बाहर आ गई, जिसे ऑपरेशन कर निकालना पड़ा, अन्यथा संक्रमण से उसकी जान जा सकती थी। न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में नरमी अपराधियों के हौसले बढ़ाती है, इसलिए कठोर सजा आवश्यक है।
यह मामला 6 मार्च 2018 का है। भदेसर थाना क्षेत्र में बच्ची की मां ढोल बजाने एक शादी में गई थी, इसी दौरान बच्ची घर से लापता हो गई। अगले दिन सुबह बच्ची लहूलुहान हालत में मिली, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर आरोपी को गिरफ्तार कर चालान पेश किया।
इस प्रकरण में आरोपी को पहले 20 फरवरी 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। आरोपी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी और खुद को नाबालिग बताया। हाईकोर्ट ने मामले को किशोर न्याय बोर्ड भेजा, जहां जांच के बाद केस पुनः पॉक्सो कोर्ट को सौंपा गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 23 गवाह और 40 दस्तावेज पेश किए। अदालत ने पीड़िता को 5 लाख रुपए प्रतिकर देने का भी आदेश दिया, जिसमें से अधिकांश राशि उसके बालिग होने तक बैंक में जमा रहेगी। अदालत ने कहा कि यह राशि पीड़िता के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है।
