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यूडीए की अतिक्रमण कार्रवाई पर छिड़ी सियासत

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यूडीए की अतिक्रमण कार्रवाई पर छिड़ी सियासत

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सवीनाखेड़ा में 110 करोड़ रुपए कीमत की जमीन को खुर्दबुर्द करने का मामला
उदयपुर, 9 नवम्बर, 9 नवंबर :
झीलों की नगरी उदयपुर में विकास प्राधिकरण (यूडीए) की सवीनाखेड़ा क्षेत्र में करीब 110 करोड़ रुपए कीमत वाली भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने वाली कार्रवाई अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। कांग्रेस, माकपा ही नहीं, बल्कि सत्ताधारी भाजपा भी अतिक्रमणकारियों के पक्ष में उतर आए हैं। जबकि यूडीए का साफ कहना है कि जब भूमि का स्वामित्व यूडीए—पूर्व में यूआईटी के नाम है तो उनकी कार्रवाई पर सवाल उठाना अनुचित है। जबकि इस मामले में यह जांच की जानी चाहिए कि अतिक्रमणकारियों को वहां बिजली—पानी की सुविधा किस तरह मिली।
तीन दिन पहले यूडीए की टीम ने शहर के सवीनाखेड़ा क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों के बनाए आवास ढहा दिए गए। जिसके बाद अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने भी अगले दिन बिजली कनेक्शन काट दिए। इसके बाद प्रभावित लोगों ने शहर विधायक ताराचंद जैन के घर पर प्रदर्शन किया। उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा प्रभावित लोगों के पास पहुंचे तथा उनकी पीड़ा को जायज ठहराते हुए उन्हें राहत पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से बात की। शहर विधायक ने भी प्रभावितों की पीड़ा की जानकारी सीएमओ को दी। इधर, कांग्रेस नेता एवं माकपा नेताओं ने पीड़ितों के पक्ष में उतर आए।
इधर, यूडीए ने साफ कर दिया है कि अतिक्रमण के खिलाफ पूरी कार्रवाई नियमों से तहत की गई। सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा किसी भी सूरत में नहीं बख्शा जाएगा।
नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर यूडीए की चुप्पी
उदयपुर प्राधिकारण ने तीन दिन पहले सवीनाखेड़ा क्षेत्र से करीब डेढ़ सौ अतिक्रमण हटाए थे। जिसमें दो सौ से अधिक लोग प्रभावित हुए। प्रभावित लोगों को जमीन पर कब्जा दिए जाने के मामले में सत्ताधारी भाजपा नेताओं के नाम सामने आए हैं। जिसको लेकर भाजपा दो धड़े में बंट गई। एक धड़ा यूडीए की कार्रवाई का समर्थन कर रहा है तो दूसरा विरोध में उतर गया। यूडीए ने अतिक्रमण करने वालों के आवास ढहा दिए लेकिन जिन जालसाजों ने उन्हें जमीन बेची या कब्जा सौंपा, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर यूडीए अभी तक कार्रवाई नहीं कर पाया। जबकि यूडीए जानता है कि वहां बसे लोगों ने अपनी खून—पसीने से कमाई करीब साढ़े बारह करोड़ रुपए खर्च कर उक्त जमीन खरीदी थी। सरकारी जमीन को खुर्दबुर्द करने को लेकर यूडीए अभी तक मामला दर्ज नहीं करा पाई है।
राजनेताओं ने पहले कराए कब्जे, फिर खुद ही खरीदने लगे
यूडीए अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भूमि पर पहले कुछ राजनेताओं ने मिलकर कब्जा करवाए और बाद में खुद ही खरीदने लगे। जिस एरिया से अतिक्रमण हटाया गया, वहां यूडीए के अनुसार जमीन की कीमत प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई के मुताबिक चार से छह हजार रुपए प्रति वर्गफीट है। जबकि नेताओं ने पांच—पांच सौ रुपए के स्टाम्प से खुद ही जमीन खरीद ली। कुछ नेताओं ने सरकारी जमीन आदिवासियों के नाम बताकर बिजली कनेक्शन दिलवा दिए।

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