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उदयपुर में प्री-पेड बूथ गायब, ऑटो चालकों की मनमानी से यात्री परेशान

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उदयपुर में प्री-पेड बूथ गायब, ऑटो चालकों की मनमानी से यात्री परेशान

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उदयपुर, 19 नवम्बर: शहर के सिटी रेलवे स्टेशन और केंद्रीय रोडवेज बस स्टैंड पर प्री-पेड ऑटोरिक्शा बूथ न होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि ऑटो चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूला जा रहा है और यात्री मजबूरी में लूट का शिकार बन रहे हैं।
शहरवासियों की शिकायतों के बाद सिटी रेलवे स्टेशन पर वर्षों पहले प्री-पेड बूथ स्थापित किया गया था। कुछ समय तक यह सुव्यवस्थित रूप से संचालित भी हुआ, लेकिन बाद में बंद कर दिया गया। लंबे समय तक बूथ जर्जर हालत में डिवाइडर पर रखा रहा और पिछले वर्ष स्टेशन भवन के विस्तार एवं जीर्णोद्धार कार्य शुरू होने के बाद इसे पूरी तरह हटा दिया गया। अब इसकी लोकेशन तक नजर नहीं आती। बूथ पर शहर के विभिन्न इलाकों की दूरी के अनुसार परिवहन विभाग द्वारा अनुमोदित किराया सूची भी लगाई जाती थी, जिससे यात्रियों को निर्धारित किराए में ही सुविधा मिलती थी।
बूथ हट जाने के बाद से ऑटोरिक्शा चालकों ने रेल यात्रियों से दो से ढाई गुना तक किराया वसूलना शुरू कर दिया है। भारी सामान लेकर उतरने वाले यात्रियों के पास कोई विकल्प न होने से वे मजबूरन मनमाफिक भुगतान कर रहे हैं। स्टेशन पर पूर्व में कायम व्यवस्था पूरी तरह खत्म होने से अव्यवस्था लगातार बढ़ रही है।
बस स्टैंड से नदारद हो गया बूथ
उदियापोल स्थित केंद्रीय बस स्टैंड पर भी वर्षों पहले प्री-पेड बूथ शुरू किया गया था। कुछ महीने चलने के बाद यहां भी बूथ बंद कर दिया गया। बाद में बस स्टैंड परिसर में सड़क निर्माण कार्य शुरू होने पर बूथ को हटाकर भीतर रखा गया। कुछ समय बाद इसे उदियापोल चौराहा पर रखा गया, लेकिन अब वह भी कहीं नजर नहीं आता। प्री-पेड सेवा पूरी तरह बंद होने से बस यात्रियों को भी ऑटो चालकों की मनमानी का सामना करना पड़ रहा है। गंतव्य तक जाने के लिए मनचाहा किराया वसूला जा रहा है और यात्रियों की शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही। शहर की दोनों प्रमुख जगहों पर प्री-पेड व्यवस्था बहाल न होने से यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा दोनों पर असर पड़ रहा है। प्रशासन से मांग है कि जल्द से जल्द प्री-पेड बूथ की व्यवस्था फिर से शुरू की जाए ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।
भूला हुआ लगेज भी मिल सकता है आसानी से
-हाल ही एक परिवार ने पंजाब केसरी को अपनी व्यथा बताई कि वे उज्जैन से उदयपुर लौटे तब जिस ऑटो को लेकर अमल का कांटा स्थित घर पहुंचे, उस ऑटो में बच्चों का बैग छूट गया। चूंकि, मुंह अंधेरे ही गाड़ी उदयपुर पहुंचती है, इसलिए हल्की नींद में होने के कारण यह चूक हो गई। उदयपुर के ही होने से उन्हें विश्वास था कि ऑटो चालक दोपहर तक पुन: पूछता हुआ आ जाएगा, लेकिन तीन-चार दिन तक नहीं आया तो उन्होंने उम्मीद छोड़ दी। उन्होंने कहा कि प्री-पैड बूथ होता तो ऑटो का नंबर और चालक का मोबाइल नंबर उनके पास रसीद में रहता, ऐसे में वे सम्पर्क कर लेते। पता नहीं, ऐसे किसी पर्यटक के साथ हो जाता होगा तब वे यहां से क्या अनुभव लेकर जाते होंगे।

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