पंचायत पुनर्गठन पर उठा विरोध
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प्रस्तावों में शामिल गांव अधिसूचना से गायब, कम आबादी वाले बने नई पंचायतें
डूंगरपुर, 25 नवम्बर (विजन 360 न्यूज डेस्क): राज्य सरकार की ओर से पंचायत पुनर्गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद डूंगरपुर जिले में बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हो गया है। ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पहले जिन राजस्व गांवों के आधार पर प्रस्ताव तैयार कर भेजे थे, अधिसूचना में उन गांवों को शामिल ही नहीं किया गया। इसके बजाय कम आबादी वाले और बिना प्रस्ताव वाले गांवों को नई पंचायत घोषित कर दिया गया, जिससे लोगों में नाराजगी फैल गई है।
कलेक्ट्रेट परिसर में लगातार ग्रामीणों की भीड़ पहुंचकर विरोध जता रही है। उनका कहना है कि प्रस्तावित पंचायतें अधिसूचना में दिखाई ही नहीं दे रहीं, जबकि कई बड़े राजस्व गांवों को पंचायत का दर्जा देने के बजाय उन्हें दूरस्थ पंचायतों में जोड़ दिया गया है। इससे गांवों की दूरी पंचायत मुख्यालय से बढ़ गई है और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
उंदरड़ा, खेरवाड़ा, कटारापाडा और वजेपुरा के ग्रामीणों ने जताया रोष
उंदरड़ा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि उंदरड़ा व भाटड़ा की संयुक्त जनसंख्या के आधार पर उंदरड़ा को नई पंचायत बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अधिसूचना में उसे 4 किमी दूर स्थित ऊपर गांव पंचायत में जोड़ दिया गया। पंथाल व पीथापुर के ग्रामीणों ने बताया कि खेरवाड़ा को नवसृजित पंचायत बनाने का प्रस्ताव था, पर अधिसूचना में उसे शामिल नहीं किया गया और उन्हें 10 किमी दूर कवालियादरा पंचायत में जोड़ दिया गया, जबकि खेरवाड़ा उनसे मात्र 2 किमी दूर है। कटारापाडा के लोगों ने भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। अधिक जनसंख्या वाले कटारापाडा की जगह नोलियावाड़ा को पंचायत बना दिया गया। वजेपुरा के ग्रामीणों ने मांग की कि जनसंख्या व वार्ड संख्या अधिक होने के बावजूद सालमपुर को नई पंचायत बना दिया गया, जो उचित नहीं है।
छैला गांव को खेरवाड़ा में रखने की मांग
छैला गांव के लोगों ने बताया कि प्रस्ताव में उसे खेरवाड़ा पंचायत में यथावत रखा गया था, लेकिन अधिसूचना में उसे 5 किमी दूर धुमनिया भेज दिया गया। ग्रामीणों ने इसे गलत बताते हुए निर्णय वापस लेने की मांग की है।
