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चित्तौड़गढ़ में बारिश से अफीम किसानों की बढ़ीं मुश्किलें

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चित्तौड़गढ़ में बारिश से अफीम किसानों की बढ़ीं मुश्किलें

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खेतों में पानी भरने से सड़े बीज, दोबारा करनी पड़ेगी बुवाई
चित्तौड़गढ़, 1 नवम्बर(विजन 360 न्यूज डेस्क):
जिले में लगातार हो रही बारिश ने अफीम किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिन किसानों ने जल्दी बुवाई कर ली थी, उनके खेतों में पानी भर जाने से बीज सड़ गए हैं और अब उन्हें खेत दोबारा तैयार कर बुवाई करनी पड़ रही है। अचानक हुए मौसम परिवर्तन ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
इस वर्ष अफीम नीति समय से पहले आने के कारण नारकोटिक्स विभाग ने अक्टूबर में ही किसानों को लाइसेंस जारी कर दिए थे। आमतौर पर यह प्रक्रिया नवंबर में पूरी होती है। जल्दी लाइसेंस मिलने से किसानों ने बुवाई शुरू कर दी थी, लेकिन समय से पहले आई बारिश ने सारी योजना बिगाड़ दी। खेतों में पानी भरने और मिट्टी गीली रहने से बीज नष्ट हो गए, जिससे किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है।
कई किसान अब नारकोटिक्स विभाग में अपने खेतों के खसरा नंबर बदलवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं ताकि दूसरी जमीन पर बुवाई की जा सके। जिनके पास अतिरिक्त खेत नहीं हैं, वे मोटर लगाकर खेतों से पानी निकालने में जुटे हैं। भदेसर के पीपलवास निवासी अफीम मुखिया रतनलाल ने बताया कि बारिश के कारण किसान लगभग 10 दिन पिछड़ गए हैं। खेतों को फिर से तैयार करने में समय लगेगा और मौसम विभाग की ओर से दोबारा बारिश की चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है।
इस बार जिले सहित तीनों डिवीजनों में कुल 21,721 किसानों को अफीम उत्पादन के लाइसेंस जारी किए गए हैं। इनमें तीसरे डिवीजन में गम पद्धति के 5,650 और सीपीएस पद्धति के 1,655 पट्टे शामिल हैं। यदि अब बारिश नहीं होती तो दिसंबर में खेतों की नपती (माप-जोख) का कार्य शुरू हो जाएगा।
किसान पुराने बीजों से दोबारा बुवाई की तैयारी में जुटे हैं। उदयपुर और चित्तौड़गढ़ में बीज आसानी से उपलब्ध हैं, जबकि खाद और दवाइयां मंदसौर व पिपलिया मंडी से खरीदी जा रही हैं। कृषि विशेषज्ञ भी खेतों का निरीक्षण कर किसानों को सलाह दे रहे हैं।
ठंड से भी नुकसान की आशंका
मौसम विभाग ने ठंड बढ़ने की चेतावनी दी है, जिससे किसानों की चिंता और गहरी हो गई है, क्योंकि ज्यादा ठंड में अफीम के पौधे कमजोर पड़ जाते हैं। फिलहाल किसान आसमान साफ होने और खेत सूखने का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अब बारिश नहीं हुई और धूप बनी रही तो दिसंबर तक फसल संभल सकती है और नुकसान की भरपाई संभव हो सकेगी।

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