जनजाति किसानों के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए: डॉ. सारस्वत
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एमपीयूएटी (MPUAT) ने भव्यता से मनाया 26वां स्थापना दिवस समारोह
उदयपुर, 1 नवम्बर: महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT) ने शनिवार को अपना 26वां स्थापना दिवस समारोह आरसीए के नूतन सभागार में धूमधाम से मनाया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कोटा कृषि विश्वविद्यालय एवं मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलगुरु डॉ. भगवती प्रसाद सारस्वत ने कहा कि दक्षिणी राजस्थान अपनी अलग पहचान रखता है, जिसका मुख्य कारण यहाँ की जनजाति बहुल भूमि, अलग मृदा संरचना और छोटी जोत है। उन्होंने MPUAT से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय को लघु-सीमांत आदिवासी कृषकों के उद्धार और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए खास कार्यक्रम चलाने होंगे।
नवनियुक्त कुलपति का फोकस:
समारोह की अध्यक्षता करते हुए MPUAT के नवनियुक्त कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया कि उनका पूरा ध्यान शिक्षा के साथ कौशल विकास पर रहेगा। उन्होंने छात्रों से डिग्री लेने के बाद पूरी लगन से काम शुरू करने और दूसरों को प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने हाल ही में मानसून की वापसी से किसानों की पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि शोध, शिक्षा और प्रसार के क्षेत्र में नए तरीके अपनाने की जरूरत है, साथ ही पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और प्राकृतिक खेती पर अधिक जोर देना होगा।
कृषि शिक्षा में MPUAT की बनी पहचान
विशिष्ट अतिथि और निवर्तमान कुलगुरु डॉ. अजीत कुमार कर्नाटक ने बताया कि देश में 74 कृषि विश्वविद्यालय हैं, लेकिन जोबनेर के बाद MPUAT को राजस्थान में कृषि शिक्षा का ध्वजवाहक माना जाता है। उन्होंने गर्व से बताया कि पिछले तीन वर्षों में MPUAT ने 45 पेटेंट हासिल किए और वर्तमान में 58 पेटेंट के साथ देश में शीर्ष विश्वविद्यालयों में शामिल है।
पूर्व कुलगुरु डॉ. उमाशंकर शर्मा ने बताया कि स्थापना के बाद से अब तक देखे गए लगभग 15 कुलपतियों में से 10 इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। ICAR के पूर्व महानिदेशक डॉ. एन.एस. राठौड़ और पूर्व कुलपति डॉ. एस.एल. मेहता, तथा वर्धमान कोटा खुला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी.एल. वर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत में सभी अतिथियों ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप और कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए. राठौड़ की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। निदेशक अनुसंधान डॉ. अरविन्द वर्मा ने विश्वविद्यालय की 26 वर्षों की उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
पुस्तक विमोचन:
इस अवसर पर अतिथियों ने दो पुस्तकों का विमोचन भी किया। डॉ. निकिता वधावन एवं डॉ. लोकेश गुप्ता द्वारा लिखित – ‘फ्रूट एंड वेजीटेबल प्रिजरवेशन एवं प्रोसेसिंग’ और डॉ. हरिसिंह व डॉ. अरविन्द वर्मा द्वारा लिखित – ‘बियोन्ड राइज: इनसाइड फ्रॉम क्रॉप डाइवरसीफिकेशन का विमोचन किया।
