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अस्तित्व के लिए जूझ रहा रुंडेला तालाब

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अस्तित्व के लिए जूझ रहा रुंडेला तालाब

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फुटपाथ निर्माण से संरक्षण की मांग, तालाब का पानी पहुंचा सड़क किनारे तक
उदयपुर, 12 अक्टूबर:
शहर के प्रतापनगर-बलीचा बाईपास पर गीतांजली हॉस्पिटल के पास स्थित रुंडेला तालाब आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। बरसात के दिनों में लबालब भरने वाला यह तालाब हर साल प्रशासन और अतिक्रमणकारियों को उसकी सीमाएं याद दिलाता है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही से इसके पेटे पर लगातार कब्जे बढ़ते जा रहे हैं।
इस वर्ष भारी वर्षा से तालाब ओवरफ्लो हो गया। पानी की धारा इतनी तीव्र थी कि बाईपास किनारे सड़क पर बहाव नदी जैसा दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। यह पानी मनवाखेड़ा होकर आयड़ नदी में गिरता है। तालाब का मूल पेटा विस्तृत है, लेकिन स्वार्थी तत्वों ने इसमें आवासीय योजनाएं काटकर भूखंड बेच दिए। कई खरीदारों ने नींव और दीवारें भी खड़ी कर दी हैं, जिनमें से कुछ निर्माण इस समय पानी में डूबे हुए हैं।
करीब दो दशक पहले भुवाणा-प्रतापनगर-बलीचा बाईपास के निर्माण के दौरान तालाब दो हिस्सों में बंट गया था। अब केवल एक हिस्से में बरसाती पानी भरता है, जबकि दूसरे हिस्से में जलराशि रिसाव से पहुंचती है। इस बार पानी ने तालाब की मूल सीमा को फिर उजागर कर दिया है।
तितरड़ी उप सरपंच बोले, तालाब के चारों ओर बनाएं फुटपाथ
तितरड़ी उपसरपंच मनोहर सिंह सिसोदिया का कहना है कि तालाब की चारों ओर 8-8 फीट चौड़ा फुटपाथ बनाकर इसका स्थायी संरक्षण किया जा सकता है। इससे न केवल तालाब सुरक्षित रहेगा बल्कि यह पर्यटन और मनोरंजन स्थल भी बन सकता है। रूंडेला तालाब क्षेत्र की लाइफलाइन है, जिससे आसपास के कुएं, हैंडपंप और बोरवेल रीचार्ज होते हैं। इसके सूखने पर भूजल स्तर तेजी से गिर जाता है। यूडीए ने पूर्व में करीब 10 लाख रुपए खर्च कर मुटाम (सीमा चिन्ह) बनाए थे, लेकिन अतिक्रमण की रफ्तार अब भी नहीं रुकी है। यूडीए आयुक्त राहुल जैन का कहना है कि इसका नए सिरे से परीक्षण करवाएंगे।

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