रमेश ईनाणी हत्याकांड में संत रमताराम की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
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कोर्ट ने माना शूटर से कनेक्शन, संत पर कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का आरोप
चित्तौड़गढ़, 23 दिसंबर: चित्तौड़गढ़ के चर्चित रमेश ईनाणी हत्याकांड में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए रामस्नेही संत रमताराम की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। ADJ-1 कोर्ट ने संत रमताराम को प्रथम दृष्टया हत्याकांड का मुख्य आरोपी मानते हुए किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश तकनीकी साक्ष्य, गवाहों के बयान और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग के आरोपों को गंभीर माना।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि संत रमताराम और शूटर के बीच लगातार संपर्क रहा। मोबाइल कॉल डिटेल, व्हाट्सएप कॉल, लोकेशन डेटा और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान इस ओर इशारा करते हैं कि हत्या पूर्व नियोजित थी। अभियोजन ने इसे जमीन विवाद से जुड़ा कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का मामला बताया।
कोतवाली थाना प्रभारी तुलसीराम प्रजापत ने कोर्ट को बताया कि जांच में यह साफ हुआ है कि संत और शूटर के बीच निरंतर संपर्क था। प्रारंभिक पूछताछ में संत द्वारा शूटर को न पहचानने का दावा बाद में सामने आए साक्ष्यों से गलत साबित हुआ। पुलिस ने कहा कि कुछ रकम अलग-अलग खातों के माध्यम से शूटर तक पहुंचाई गई, जो आपसी संबंध को दर्शाती है।
जमीन विवाद बना हत्या का मोटिव
पुलिस के अनुसार रमेश ईनाणी और संत रमताराम के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद को हत्या का मुख्य कारण माना जा रहा है। कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य वारदात से पहले और बाद में संपर्क को साबित करते हैं। अभियोजन ने कोर्ट को बताया कि संत रमताराम 24 नवंबर से फरार हैं। पूछताछ से पहले उनका फोन बंद करना और रामद्वारा से गायब हो जाना संदेह को और गहरा करता है। संत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार व्यास ने कहा कि कोई सीधा सबूत नहीं है और संत को झूठा फंसाया गया है। उन्होंने बताया कि जमीन विवाद के मामलों में संत के पक्ष में अदालतों से फैसले आ चुके हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठासीन अधिकारी अटल सिंह चम्पावत ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया गंभीर आरोप बनते हैं। इसी आधार पर अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
