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सरकारी उपेक्षा से उदयसागर डूब क्षेत्र में बाढ़, आधा दर्जन गांव प्रभावित

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सरकारी उपेक्षा से उदयसागर डूब क्षेत्र में बाढ़, आधा दर्जन गांव प्रभावित

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राजेश वर्मा
उदयपुर, 9 सितम्बर:
उदयपुर के गोगुंदा से उद्गम होने वाली आयड़ नदी, मदार बड़ा-छोटा, फतहसागर और स्वरुपसागर तालाबों के ओवरफ्लो के कारण उदयसागर झील लबालब भर गई। झील की समय पर निकासी बढ़ाने का काम नहीं होने से आधा दर्जन गांव डूब गए। जल संसाधन विभाग ने प्रस्ताव भेजा था, लेकिन राजस्थान सरकार स्तर पर स्वीकृति लंबित रहने के कारण कार्य नहीं हो पाया।
उदयपुर में हाल ही में एक ही दिन में चार-पांच घंटे की भारी बारिश ने शहर में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर दी। आयड़ नदी किनारे के आबादी क्षेत्र पानी में डूब गए। लाखों रुपये का नुकसान हुआ और सैकड़ों दुपहिया-चारपहिया वाहन खराब हुए। सौंदर्यीकरण के नाम पर किए गए करोड़ों का काम भी बर्बाद हो गया।
जल संसाधन खंड उदयपुर की फ्लड कंटिजेंसी रिपोर्ट के अनुसार मदार, फतहसागर और स्वरुपसागर तालाबों के भर जाने पर अतिरिक्त पानी आयड़ नदी और गुमानियावाला नाले से शहर की ओर बहता है। सतोरिया नाले की अपर्याप्त जल निकासी भी जल प्लावन की स्थिति पैदा करती है।
वर्ष 2006 में भी डूब क्षेत्र के आसपास लकड़वास, टीलों का खेड़ा, देबारी, पनवाड़ी, कमलोद, मटून, भोईयों की पचोली, डांगियों की पंचोली, खरबडतया और कानपुर जैसे लगभग दस गांव पानी में डूबे थे। रिपोर्ट में झील के अधिकतम जल स्तर को 38.17 फीट मानकर इस क्षेत्र को निर्माण निषेध क्षेत्र घोषित करने और प्रशासनिक स्तर पर पालना सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
प्रस्ताव की मंजूरी के इंतजार में बढ़ती जा रही लागत
उदयसागर बांध के ओवरफ्लो सेक्शन को चौड़ा या गहरा करने के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रस्ताव आपदा प्रबंधन एवं सहायता विभाग जयपुर को भेजा गया था। अद्यतन लागत 57 करोड़ रुपये हो चुकी है। जल संसाधन विभाग के अधिशासी अभियंता किशन मीणा का कहना है कि भविष्य में डूब क्षेत्र के नुकसान से बचाने का एकमात्र उपाय उदयसागर झील की निकासी बढ़ाना ही है। इस उपेक्षा के कारण बाढ़ की समस्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है, और गांवों की सुरक्षा तथा शहर की जल निकासी के लिए तत्काल कार्रवाई आवश्यक है।
उदयसागर झील एक नजर में
लंबाई 4 किमी
चौड़ाई 2.5 किमी
सतह क्षेत्रफल 10.5 किमी
अधिकतम गहराई 9 मीटर
पूर्ण भराव गेज (मीटर में) 7.32
कुल भराव क्षमता (मिलीयन टन मीटर में) 31.15
उपयोगी भराव क्षमता (मिलियन टन मीटर में) 27.61
उदयसागर की जरुरत क्यों
1559 ईस्वी में मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह द्वितीय ने पानी की आपूर्ति को अच्छा करने के लिए सोचा था और फिर बाद में उदयसागर झील का निर्माण करवाया था। इस झील का निर्माण इसलिए भी करवाया था ताकि साम्राज्य तक पानी आसानी से पहुंच सके। यह झील बाहरी बांध से विकसित है। वर्तमान में उदयसागर झील से आसपास कृषि सिंचाई में उपयोगी होने के साथ ही यहां से ओवरफ्लो होने वाले पानी से समीपवर्ती वल्लभनगर, कुराबड़ आदि तालाब, बांध भरते हैं। इसके अलावा उदयसागर से हिंदुस्तान जिंक के देबारी स्थित स्मेल्टर संयंत्र में बड़ी मात्रा में वर्ष पर्यन्त जलापूर्ति होती है।

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