शिल्पग्राम उत्सव : बंगाल के राय बेंसे लोक नृत्य ने एक्रोबेटिक युद्ध कौशल से बांधा समां
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उदयपुर, 26 दिसम्बर : पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयपुर की ओर से आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव में शुक्रवार शाम मुक्ताकाशी मंच पर देशभर की लोक संस्कृतियों का भव्य संगम देखने को मिला। खचाखच भरे मंच पर पश्चिम बंगाल के पारंपरिक राय बेंसे लोक नृत्य ने दर्शकों में नई ऊर्जा और रोमांच भर दिया। पुरुष नर्तकों द्वारा प्रस्तुत इस नृत्य में शौर्य, युद्ध कौशल और शानदार एक्रोबेटिक मूव्स ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके साथ ही बंगाल के ही नटुआ नृत्य में मार्शल आर्ट आधारित नृत्य शैली ने खूब वाहवाही बटोरी। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज क्षेत्र के ढेड़िया लोक नृत्य में नर्तकियों ने सिर पर मिट्टी का घड़ा रख संतुलन का अद्भुत प्रदर्शन किया।
शाम की प्रस्तुतियों में जम्मू का डोगरी लोक नृत्य जगरना, राजस्थान की सहरिया आदिवासी संस्कृति का सहरिया स्वांग व सफेद आंगी गेर, उत्तराखंड का छापेली, गोवा का समई नृत्य, त्रिपुरा का होजागिरी, महाराष्ट्र का मल्लखंभ और मणिपुर की मार्शल आर्ट आधारित थांग-ता ने लोक के रंग-लोक के संग की थीम को जीवंत कर दिया। छत्तीसगढ़ की पंडवानी ज्ञान ने आध्यात्म और जोश का अनूठा समन्वय प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम संचालन मोहिता दीक्षित और यश दीक्षित ने किया। बंजारा मंच पर ‘हिवड़ा री हूक’ कार्यक्रम में मेलार्थियों ने गायन और कविता के माध्यम से अपनी प्रतिभा दिखाई। वहीं विभिन्न थड़ों पर दिनभर चल रही लोक प्रस्तुतियां और बहरूपियों की कलाओं ने शिल्पग्राम को जीवंत उत्सव में बदल दिया।
शिल्पग्राम उत्सव के अंतर्गत शनिवार शाम लोक और शास्त्रीय कलाओं की श्रृंखला गुजरात के ऊर्जावान सिद्धि धमाल डांस से होगी, जिसके बाद तबला, पखावज, ढोलक, नगाड़ा, सारंगी और सितार जैसे वाद्ययंत्रों पर शास्त्रीय व लोक धुनों की प्रस्तुति ‘ताल कचहरी’ के माध्यम से दी जाएगी।
अन्य आकर्षण में असम का बिहू नृत्य और राजस्थान का कालबेलिया डांस, सिक्किम के भूटिया समुदाय द्वारा प्रस्तुत सिंघी छम लोक नृत्य और भपंग वादन की प्रस्तुति भी दर्शकों को खूब लुभाएगी।
