LOADING

Type to search

जयपुर, जोधपुर, बीकानेर की स्लीपर बसें हड़ताल में रहीं बंद, उदयपुर के ट्रावेल्स शामिल नहीं

Local

जयपुर, जोधपुर, बीकानेर की स्लीपर बसें हड़ताल में रहीं बंद, उदयपुर के ट्रावेल्स शामिल नहीं

Share

बसों के थमे चक्के, हड़ताल का असर पूरे प्रदेश में
उदयपुर, 2 नवम्बर:
जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर, झुंझुंनू और सीकर के ट्रावेल्स संचालक परिवहन विभाग की सख्त कार्रवाई के विरोध में रविवार को हड़ताल पर चले गए। इसके चलते इन शहरों से उदयपुर आने वाली स्लीपर बसें पूरी तरह बंद रहीं। हड़ताल का मुख्य कारण प्रदेश में बसों की जांच और सीजिंग का समय न दिए जाने से निजी ट्रावेल्स संचालकों की नाराजगी बताई जा रही है।
उदयपुर के ट्रावेल्स संचालक फिलहाल हड़ताल में शामिल नहीं हुए हैं। उदयपुर ट्रावेल्स एसोसिएशन के महामंत्री शंकर भाटिया ने बताया कि शहर के संचालक अपनी बैठकें जारी रखे हुए हैं और सोमवार तक अंतिम निर्णय किया जाएगा। भाटिया ने कहा कि सभी बसों में तकनीकी खामियां नहीं हैं, लेकिन परिवहन विभाग ने समय न देकर अचानक कार्रवाई की, जिससे संचालन ठप हो गया।
हड़ताल प्रभावित रूटों पर यात्री दबाव
निजी ट्रावेल्स बसों के हड़ताल के चलते प्रभावित रूट के यात्री अब रोडवेज बसों और रेलगाड़ियों पर निर्भर रहे। रविवार को ग्राम विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों को बस-ट्रेनों में भारी भीड़ का सामना करना पड़ा। कई रूटों पर यात्रियों के बैठने की जगह तक नहीं थी।
संचालकों का विरोध, सरकार से सहयोग की मांग
भाटिया ने यह भी कहा कि किसी एक बस में हादसा हो जाने का मतलब यह नहीं कि सभी बसें खराब हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि विमान में तकनीकी खामी के कारण हादसा हो जाता है तो क्या सारी विमान सेवाएं बंद कर दी जाती हैं। इसी प्रकार, बसों के संचालन के लिए विभाग और सरकार से समय मांगा गया था, लेकिन समय न मिलने के कारण संचालन रुक गया।
हड़ताल के कारण यातायात व्यवस्था पर असर
हड़ताल से उदयपुर और अन्य शहरों के बीच परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई। बसों के बंद होने के कारण सड़क पर निजी यातायात कम और सरकारी रोडवेज बसों व रेलगाड़ियों में दबाव बढ़ गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित मार्गों पर अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं, लेकिन यात्री अभी भी असुविधा झेल रहे हैं।
अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा
उदयपुर के ट्रावेल्स संचालक स्थिति का आकलन कर सोमवार को हड़ताल में शामिल होने या न होने का अंतिम निर्णय लेंगे। इस बीच प्रभावित शहरों के यात्रियों को वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

Tags:

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *