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राजस्थान में सतही जल संग्रहण क्षमता बढ़ी, 445 बांध लबालब

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राजस्थान में सतही जल संग्रहण क्षमता बढ़ी, 445 बांध लबालब

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बड़े बांधों में 94% जल संग्रहण
उदयपुर, 16 सितंबर

राजस्थान में हाल की अच्छी वर्षा और नई सिंचाई परियोजनाओं से सतही जल संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सामान्य से 90% अधिक वर्षा के चलते राज्य के 693 बांधों में से 445 बांध पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि 153 आंशिक रूप से भरे हैं। कुल जलाशयों में 90% पानी संचित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7% अधिक है।
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 23 वृहद बांधों में 94% और 670 मध्यम-लघु बांधों में 81.72% जल संचित है। यह आंकड़ा 15 जून 2025 तक केवल 43% था। प्रदेश की 5.67% आबादी और 13.88% कृषि योग्य भूमि होने के बावजूद खेती वर्षाजल पर निर्भर है।
सिंचाई परियोजनाओं से बढ़ेगा कृषि उत्पादन
जल संकट दूर करने के लिए इंदिरा गांधी नहर, बीसलपुर, चंबल घाटी, परवन वृहद सिंचाई योजना, पार्वती नहर, नवनेरा बैराज, खमेरा लघु सिंचाई और बीकानेर संभाग की जल क्षेत्र पुनर्संरचना जैसी परियोजनाएं प्रगति पर हैं। इनसे सिंचित क्षेत्र और कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी।
नदियों को जोड़ने की परियोजनाओं पर तेजी
राज्य में नदियों को जोड़ने वाली योजनाएं भी गति पकड़ रही हैं। देवास परियोजना के तृतीय व चतुर्थ चरण में साबरमती को बनास बेसिन से जोड़ा जा रहा है। पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से चंबल और उसकी सहायक नदियों का जल दक्षिण-पूर्वी जिलों तक पहुंचाया जाएगा। पार्वती-कालीसिंध-चंबल-ईआरसीपी लिंक से मध्यप्रदेश और राजस्थान दोनों को लाभ मिलेगा।
चार वर्षों में 45 हजार जल संरचनाएं
भूजल पुनर्भरण के लिए कर्मभूमि से मातृभूमि और वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान के तहत चार वर्षों में 45 हजार जल संरचनाएं बनाई जाएंगी। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान में 20 हजार गांवों में 5 लाख संरचनाएं निर्मित होंगी।
“आत्मनिर्भर बनेगा प्रदेश”
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि बांधों के भरने से प्रदेश में समृद्धि और खुशहाली का माहौल है। सरकार का लक्ष्य जल उपलब्धता और संग्रहण में आत्मनिर्भरता है। राणा प्रताप सागर-ब्राह्मणी नदी से बीसलपुर बांध लिंक, ईसरदा-रामगढ़ बांध और अन्य योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।

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