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स्वामी अनंतराम की श्रीमद्भागवत पुराण कथा में श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावविभोर वर्णन

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स्वामी अनंतराम की श्रीमद्भागवत पुराण कथा में श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावविभोर वर्णन

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श्रीमद् भागवत जीवन को भक्ति, करुणा और धर्म से जोड़ने का मार्गदर्शक ग्रंथ:स्वामी अनंतराम
उदयपुर।
शहर के शोभागपुरा स्थित शुभ केशर गार्डन में चल रही स्वामी अनंतराम शास्त्री की श्रीमद्भागवत पुराण कथा के अंतर्गत भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं के क्रमबद्ध और रसपूर्ण वर्णन ने श्रद्धालुओं को भक्ति-रस से सराबोर कर दिया। कथा स्थल पर प्रतिदिन उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ यह प्रमाणित कर रही थी कि श्रीकृष्ण की लीलाएं आज भी जन-जन के हृदय को स्पर्श करती हैं।
डॉ. नाहर सिंह कोठारी श्रीमती गुलाब कोठारी के संकल्प के तहत आयोजित इस कथा यज्ञानुष्ठान के प्रारंभिक प्रसंगों में धेनुकासुर उद्धार का वर्णन हुआ, जहाँ तालवन को भयमुक्त कर भगवान ने ब्रजवासियों को सुख और निर्भयता प्रदान की। इसके पश्चात भगवान द्वारा ब्रजवासियों को दावानल से बचाने की लीला सुनाई गई, जिसमें श्रीकृष्ण ने अपने मुख में अग्नि को समेटकर यह संदेश दिया कि भक्तों की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं।
कथा में वेणु गीत और गोपी गीत के प्रसंगों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वेणु की मधुर तान पर गोपियों का सर्वस्व त्याग कर श्रीकृष्ण की ओर आकर्षित होना और विरह में गाए गए गोपी गीत ने प्रेम-भक्ति की पराकाष्ठा को प्रकट किया। इसके साथ ही महारास का अलौकिक वर्णन हुआ, जिसमें भगवान ने यह सिद्ध किया कि वे प्रत्येक भक्त के साथ समान रूप से उपस्थित रहते हैं।
इन्द्र की नाराज़गी और उसके परिणामस्वरूप हुई अतिवृष्टि के प्रसंग में भगवान द्वारा गौवर्धन पर्वत धारण की लीला का वर्णन अत्यंत प्रेरक रहा। सात दिनों तक पर्वत को अंगुली पर धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा करते हुए भगवान ने अहंकार के नाश और भक्ति की महिमा को स्थापित किया।
कथा में शंखचूड़ (शंखचूड़/शंखासुर) और सुदर्शन से संबंधित प्रसंगों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि अधर्म चाहे जितना भी शक्तिशाली हो, उसका अंत निश्चित है।
मथुरा लीला में कृष्ण-बलराम का मथुरा गमन, मार्ग में कुब्जा पर कृपा तथा रंगभूमि में कुवलियापीड़ जैसे उन्मत्त हाथी का वध सुनकर श्रद्धालु रोमांचित हो उठे। इसके पश्चात अत्याचारी कंस का उद्धार कर भगवान ने धर्म की पुनः स्थापना की।
कथा के उत्तरार्द्ध में द्वारका प्रसंग के अंतर्गत रुक्मिणी हरण और रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण वर्णन किया गया। भगवान श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी के साथ विवाह कर प्रेम, मर्यादा और नारी-सम्मान का आदर्श प्रस्तुत किया गया। संयोजक हेमंत लड्ढा ने बताया कि आयोजक डॉ एन एस कोठारी के पुत्र डॉ. मृदुल कोठारी और पुत्रवधू ज्योति कोठारी जब भगवान श्री कृष्ण और रुक्मिणी के वेश में जब मंच पर पहुंचे तो पूरा सभागार जयकारों से गूंज उठा। इवेंट प्रबंधन देख रहे सौरभ लड्ढा और विजय सिंह चौहान ने बताया कि इस झांकी के दौरान सभी भक्त उठ खड़े हुए और झूमते हुए नृत्य करने लगे।अथाह पुष्प वृष्टि से पूरा सभागार फूलों से लदकद हो गया।
इससे पूर्व कथावाचक स्वामी अनंतराम ने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को भक्ति, करुणा और धर्म से जोड़ने का मार्गदर्शक ग्रंथ है। कथा स्थल पर “हरि नाम” और “राधे-कृष्ण” के जयकारों से वातावरण पूर्णतः भक्तिमय बना हुआ है। शनिवार को कथा प्रवचन के दौरान कई समझ सेवियों, माहेश्वरी समाज के प्रमुख लोगों का सम्मान किया। सौरभ लड्ढा ने बताया कि माहेश्वरी फ्रेंड्स समिति उदयपुर द्वारा श्रीमद भागवत कथा वाचक स्वामी अनंतराम शास्त्री का स्वागत, अभिनंदन किया। शिवम् इवेंट कंपनी के विजय सिंह चौहान और सौरभ लड्ढा ने काफी मेहनत से आयोजन को सफल बनाया।

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