राजस्थान को सर्वाधिक राजस्व देने वाली झामरकोटड़ा माइंस में बढ़ा रोजगार संकट
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1992 के बाद नई भर्ती बंद, 1200 से घटकर रह गए केवल 275 कर्मचारी
उदयपुर, 2 अक्टूबर (राजेश वर्मा): राजस्थान सरकार का सबसे बड़ा खनन उपक्रम राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएमएल) राज्य को सर्वाधिक राजस्व देने के बावजूद गंभीर रोजगार संकट से जूझ रहा है। उदयपुर की झामरकोटड़ा फॉस्फेट माइंस, जहां कभी 1200 से ज्यादा कर्मचारी कार्यरत थे, आज मात्र 275 कर्मचारियों के सहारे चल रही है।
झामरकोटड़ा इकाई वर्ष 1970 से अब तक आरएसएमएमएल की सर्वाधिक राजस्व देने वाली इकाई रही है। हर साल यह खदान 1000 करोड़ रुपये से भी अधिक आय अर्जित करती है और देश के कुल रॉक फॉस्फेट उत्पादन में 70 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देती है। इसके बावजूद यहां मानव संसाधन की भारी कमी है।
आरएसएमएमएल कर्मचारी संघ (भामसं) के प्रदेश सचिव सत्यनारायण गुप्ता ने बताया कि पहले करीब 1300 कर्मचारी काम करते थे लेकिन वर्ष 1992 के बाद नई भर्ती नहीं हुई और हर साल कर्मचारी सेवानिवृत होते गए। रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति करने के बजाय सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनः मानदेय पर लिया जा रहा है। इसका असर युवाओं के रोजगार अवसरों पर पड़ा है। आरएसएमएमएल के अधिकारी अनिल कुमार का कहना है कि यदि राज्य सरकार द्वारा रोजगार के अवसर खोले जाते हैं तो टीएसपी व आसपास के क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को इसका लाभ मिलेगा।
अन्य इकाइयों की स्थिति भी गंभीर
जिप्सम, लिग्नाइट और लाइमस्टोन इकाइयों में भी स्थायी कर्मचारी न के बराबर बचे हैं। अशिक्षित मजदूर से लेकर आईटीआई और इंजीनियरिंग डिग्रीधारी युवा तक स्थायी रोजगार की प्रतीक्षा में हैं।
सरकार से नई भर्ती खोलने की मांग
आरएसएमएमएल कर्मचारी संघ और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि स्थायी पदों पर भर्ती खोली जाती है तो टीएसपी और आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों युवाओं को लाभ मिलेगा। इससे उत्पादन सुचारू रहेगा और बेरोजगारी भी घटेगी। कंपनी गोल्डन जुबली बना रही है लेकिन नए कर्मचारियों की भर्ती नहीं हो रही है।
