सुखाड़िया विश्वविद्यालय को दी जाए चम्पा बाग व निरंजनी अखाड़ा की भूमि
Share
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की अवाप्तिधीन भूमि पर अवैध कब्जे को हटाने के लिए उदयपुर सांसद डॉ. रावत ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र
उदयपुर, 26 नवम्बर: सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने मुख्यमंत्री डॉ. भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की 14.5900 हेक्टेयर अवाप्तिधीन भूमि पर अवैध कब्जा और अनाधिकृत निर्माण करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है। सांसद ने यह भी कहा कि भूमि का कब्जा तुरंत मुक्त कराया जाना चाहिए ताकि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के विकास और विस्तार में कोई बाधा न आए।
हाईकोर्ट दे चुका विश्वविद्यालय के पक्ष में फैसला
सांसद ने बताया कि राजस्थान सरकार ने 3 अक्टूबर 1981 को विश्वविद्यालय के विकास हेतु चम्पा बाग एवं निरंजनी अखाड़ा की 14.5900 हेक्टेयर भूमि अवाप्त की थी। यह अधिसूचना राजस्थान भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1953 की धारा 4(1) के तहत जारी की गई और 30 अक्टूबर 1981 को राजपत्र में प्रकाशित हुई। उच्च न्यायालय की 30 मई 2024 की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय के पक्ष में निर्णय दिया और पूर्व के सभी अपील व स्थगन आदेश रद्द किए। खंडपीठ ने अधिसूचना को वैध माना।
सांसद ने बताया अवमानना और छात्रों के अधिकारों का हनन
स्थगन आदेशों के बावजूद निजी पक्षकारों ने भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण कार्य शुरू कर दिया। सांसद डॉ. रावत ने इसे उच्च न्यायालय की अवमानना और छात्रों के अधिकारों का हनन बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए विश्वविद्यालय को भविष्य की जरूरतों के लिए भूमि की आवश्यकता है। वर्तमान बाजारी दरों के अनुसार, 14.5900 हेक्टेयर भूमि का मूल्य लगभग 4000 करोड़ रुपए है। डॉ. रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय की उदासीनता और जिला कलेक्टर द्वारा धारा 5(ए) के तहत कार्रवाई न करने से उच्च न्यायालय के निर्णय का समयबद्ध क्रियान्वयन बाधित हो रहा है।
हाल ही में विश्वविद्यालय की स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की रिपोर्ट में भी इस मामले को गंभीर रूप से उठाया गया है।
सांसद की सिफारिश
डॉ. रावत ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि भूमि अवाप्ति प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए, अवैध कब्जा हटाया जाए और विश्वविद्यालय को समय पर विस्तार और विकास की सुविधा दी जाए।
एक नजर
भूमि क्षेत्र: 14.5900 हेक्टेयर
अवाप्ति अधिसूचना: 3 अक्टूबर 1981
राजपत्र प्रकाशन: 30 अक्टूबर 1981
उच्च न्यायालय निर्णय: 30 मई 2024
मौजूदा बाजार मूल्य: लगभग 4000 करोड़ रुपए
गुजर गए 44 साल, विवि का नाम तक बदल गया
चम्पाबाग में विश्वविद्यालय के स्वामित्व वाली 14.59 हेक्टेयर बेशकीमती जमीन का विवाद 44 साल पुराना है। चार दशक से ज्यादा बीतने के बाद भी यह जमीन विश्वविद्यालय को नहीं मिल पाई। खास बात ये है कि तब विश्वविद्यालय का नाम भी उदयपुर विश्वविद्यालय था, लेकिन अब इतने वर्षों बाद विश्वविद्यालय का नाम तो बदल गया लेकिन हालात नहीं बदले। तत्कालीन कुलपति प्रो. अमेरिका सिंह ने चम्पाबाग की जमीन के कब्जे को लेकर उनके और स्थानीय नेता गुलाबचंद कटारिया के बीच वाद—विवाद भी सुर्खियों में रहा।
