उदयपुर का मेयर होगा पावरफुल: वार्ड परिसीमन से बढ़ेगा राजनीतिक दबदबा
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दो सांसदों और चार विधायकों की भी शहर में रहेगी भूमिका
नगर निगम के 70 से बढ़कर 80 वार्डों में बदलेगी राजनीति
उदयपुर, 30 सितंबर: उदयपुर नगर निगम के वार्डों की संख्या 70 से बढ़ाकर 80 कर दी गई है। परिसीमन के बाद अब नगर निगम में चार विधानसभा क्षेत्र और दो संसदीय क्षेत्र शामिल हो गए हैं। इससे मेयर का राजनीतिक प्रभाव बढ़ जाएगा। अब मेयर को चारों विधानसभा क्षेत्रों के विधायक अपने इलाकों में नगर निगम से काम कराने के लिए सक्रिय होंगे, जिससे मेयर की ताकत और शहर में प्रभाव बढ़ेगा।
कार्यकर्ता और आरक्षण लॉटरी का इंतजार
नवीन सीमांकन के बाद पार्षद बनने की तैयारी कर रहे कार्यकर्ता अब वार्ड आरक्षण और मेयर पद के आरक्षण की लॉटरी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वार्डों का आरक्षण लॉटरी पर निर्भर करेगा, जिसके बाद ही प्रत्याशी का चुनाव लड़ना तय होगा। चुनाव में टिकट वितरण में उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, गोगुंदा विधायक प्रताप लाल भील और मावली विधायक उदयलाल डांगी की अहम भूमिका रहेगी। इसके चलते उनके करीबी और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
नए वार्ड और जातीय समीकरण
नए वार्डों में गोगुंदा, मावली और ग्रामीण क्षेत्रों के कई इलाके शामिल किए गए हैं। इससे भाजपा और कांग्रेस के लिए राजनीतिक गणित और जातीय समीकरण बदल गए हैं। कुछ वार्डों में भाजपा का बेस मजबूत रहेगा, जबकि आदिवासी क्षेत्रों के शामिल होने से कांग्रेस और भारत आदिवासी पार्टी की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
ग्रामीण कार्यकर्ताओं को शहरी अवसर
अब तक ग्रामीण राजनीति में सक्रिय कार्यकर्ताओं को शहरी सरकार का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा। निगम वार्डों में चुनाव जीतने के बाद वे निगम बोर्ड की बैठकों में भाग लेकर शहरी विकास में योगदान दे सकेंगे। राजनीतिक दल पहले से ही नए सीमांकन के आधार पर अपने संगठन को मजबूत करने और जमीनी तैयारी में जुटे हैं।
चुनाव की तैयारी और रणनीति
चुनाव तिथि और लॉटरी की घोषणा के बाद कार्यकर्ता पूरी मेहनत और संसाधन खर्च करके अपने वार्डों में सक्रिय होंगे। इस प्रक्रिया में पार्टी संगठन, जातीय समीकरण और जमीनी सक्रियता प्रमुख भूमिका निभाएंगे।
