बाल विवाह नहीं कराने की शर्त पर नाबालिग को माता-पिता के सुपुर्द किया
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हाईकोर्ट में पेरेंट्स का वचन, 18 वर्ष की होने से पहले बिना मर्जी शादी नहीं करेंगे
चित्तौड़गढ़/जोधपुर, 6 नवम्बर (विजन 360 न्यूज डेस्क): राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर ने 19 सितम्बर से लापता चल रही 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से संबंधित हैबियस कॉर्पस याचिका का निपटारा करते हुए उसे माता-पिता को इस शर्त पर सौंपा है कि वे उसके 18 साल की होने तक बिना मर्जी शादी नहीं करेंगे। जस्टिस विनित कुमार माथुर और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।
चित्तौड़गढ़ के भदेसर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली याचिकाकर्ता ने अपनी लापता बेटी को बरामद करने के लिए यह याचिका दायर की थी। इसमें राज्य सरकार, चित्तौड़गढ़ पुलिस अधीक्षक और भदेसर थानाधिकारी के अलावा नाहरगढ़ निवासी एक अन्य व्यक्ति को भी पक्षकार बनाया गया था। कोर्ट के निर्देश पर नाबालिग ‘बी’ को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। न्यायाधीशों ने नाबालिग से बातचीत की। 16 वर्षीय लड़की ने कोर्ट को बताया कि उसके माता-पिता उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे थे। वे उसकी शादी ऐसी जगह कराने की कोशिश कर रहे थे, जो उसकी पसंद से नहीं थी, जबकि उसने अभी 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है।
नाबालिग ने कोर्ट को बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ तभी जाने को तैयार है, जब वे कोर्ट के समक्ष यह वचन दें कि 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले उसकी सहमति के बिना उसकी शादी नहीं की जाएगी। उसने यह भी कहा कि अगर वह अपने पैतृक घर जाती है, तो उसे दुर्व्यवहार की आशंका है। याचिकाकर्ता (नाबालिग की मां) के वकील ने कोर्ट को बताया कि कॉर्पस के माता-पिता यह वचन देते हैं कि वे 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले नाबालिग ‘बी’ की सहमति के बिना उसकी शादी नहीं करेंगे। वकील ने कहा कि माता-पिता नाबालिग के साथ अच्छा व्यवहार करेंगे और उसकी भलाई का ध्यान रखेंगे। कोर्ट के समक्ष दिए गए बयान और याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए वचन को देखते हुए खंडपीठ ने नाबालिग ‘बी’ की अभिरक्षा याचिकाकर्ता को सौंप दी। साथ ही आदेश दिया कि यदि माता-पिता द्वारा नाबालिग के साथ दुर्व्यवहार की कोई घटना की सूचना मिलती है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
